Battle Of Buxar: 19 जुलाई 1763, आज ही के दिन शुरू हुई घटनाओं की शृंखला ने अंततः भारत के इतिहास की दिशा हमेशा के लिए बदल दी. हालांकि युद्ध की मुख्य लड़ाई 22 अक्टूबर 1764 को हुई, लेकिन इसकी जड़ें 1763 से ही जुड़ी हुई थीं. बक्सर का युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए उतना ही महत्वपूर्ण था, जितना प्लासी का युद्ध. इस एक युद्ध ने मुगल साम्राज्य की अंतिम शक्ति को तोड़ दिया और बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा पर कंपनी का पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर दिया.
युद्ध की पृष्ठभूमि
बंगाल के नवाब मीर कासिम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते हस्तक्षेप और अवैध व्यापार से तंग आकर कंपनी के विरुद्ध विद्रोह कर दिया. कई छोटी-बड़ी झड़पों के बाद मीर कासिम को पराजय का सामना करना पड़ा. वह भागकर अवध (उत्तर प्रदेश) पहुंचा और वहां के नवाब शुजाउद्दौला की शरण में चला गया.
मीर कासिम ने एक महत्वाकांक्षी गठबंधन तैयार किया. इसमें शामिल थे:
- मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय
- अवध के नवाब शुजाउद्दौला
- मीर कासिम स्वयं
इन तीनों ने मिलकर अंग्रेजों को बंगाल से पूरी तरह खदेड़ने की योजना बनाई.
युद्ध का मैदान और सेनाएं
दोनों पक्षों की सेनाएं बिहार में बलिया से लगभग 40 किलोमीटर दूर बक्सर नामक स्थान पर आमने-सामने आईं.
संयुक्त भारतीय पक्ष:
- मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय
- अवध के नवाब शुजाउद्दौला
- मीर कासिम
अंग्रेज पक्ष:
- नेतृत्व: कुशल सेनापति कैप्टन हेक्टर मुनरो (Captain Hector Munro)
युद्ध शुरू होने से पहले ही अंग्रेजों ने चतुराई से काम लिया. उन्होंने अवध की सेना के प्रमुख अधिकारियों असद खां, साहूमल और जैनुल आबिदीन को भारी रिश्वत देकर अपनी तरफ मिला लिया. यह गद्दारी युद्ध के परिणाम को तय करने वाली साबित हुई.
युद्ध और परिणाम (22 अक्टूबर 1764)
युद्ध मात्र तीन घंटे में समाप्त हो गया. अंग्रेजों की बेहतर अनुशासन, आधुनिक हथियारों और तोपखाने की मारक क्षमता के सामने संयुक्त सेना टिक नहीं पाई.
- मीर कासिम युद्ध हारकर भाग निकला और बाकी जीवन भटकता रहा. अंततः 1777 में दिल्ली के निकट अज्ञात अवस्था में उसकी मृत्यु हो गई.
- शाह आलम द्वितीय तुरंत अंग्रेजों की तरफ आ गए और उनके साथ संधि कर ली.
- शुजाउद्दौला को भी हार का सामना करना पड़ा.
बक्सर की संधि और ऐतिहासिक महत्व
बक्सर की जीत के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा का दीवानी अधिकार (राजस्व वसूली का अधिकार) मिल गया. मुगल सम्राट नाम मात्र के सम्राट रह गए. इस युद्ध ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की नींव मजबूत की, जिसके परिणामस्वरूप अगले लगभग 200 वर्षों तक भारत ब्रिटिश शासन के अधीन रहा.
बक्सर का युद्ध
इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि यह मुगल साम्राज्य की अंतिम बड़ी सैन्य कोशिश थी. इसके बाद मुगलों की सैन्य शक्ति लगभग समाप्त हो गई और भारत में अंग्रेजों का प्रभुत्व निर्विवाद हो गया.
एक विश्वासघात, बेहतर रणनीति और आधुनिक युद्ध कौशल ने एक युद्ध में पूरे उत्तर भारत का भविष्य बदल दिया. 19 जुलाई 1763 से शुरू हुई यह घटनाक्रम 22 अक्टूबर 1764 को बक्सर में अपने चरम पर पहुंचा और भारत का स्वतंत्रता संग्राम शुरू होने तक लगभग दो सदी बीत गईं.
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-भारत एक्सप्रेस
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