भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जड़ें भारतीय जनसंघ में हैं, जिसकी स्थापना 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी. पश्चिम बंगाल में वामपंथी और कांग्रेस की लंबे समय तक मजबूत पकड़ के बावजूद जनसंघ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. राज्य में भाजपा/जनसंघ की पहली विधायकी जीत 1967 के विधानसभा चुनाव में हुई, जो संगठनात्मक संघर्ष और लोकल नेतृत्व की मिसाल है.
1967 का ऐतिहासिक चुनाव
1967 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनसंघ ने 58 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. राज्य की कुल 280 सीटों में से उसे केवल एक सीट पर सफलता मिली- दक्षिण 24 परगना जिले की गोसाबा (SC) विधानसभा सीट.
गोपाल चंद्र मंडल (Gopal Chandra Mandal या G.N. Mandal) जनसंघ के टिकट पर इस सीट से विजयी हुए. यह जीत पश्चिम बंगाल में जनसंघ (और बाद की भाजपा) की पहली विधायकी सफलता मानी जाती है. गोसाबा सुंदरबन क्षेत्र में स्थित SC आरक्षित सीट है, जहां स्थानीय मुद्दों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रवादी विचारधारा ने काम किया.
जनसंघ को उस समय कुल वोट मिले, लेकिन संगठनात्मक रूप से कमजोर होने के बावजूद एक सीट जीतना बड़े मायने रखता था. उस समय बंगाल में वामपंथी लहर चल रही थी.
गोपाल चंद्र मंडल कौन थे?
गोपाल चंद्र मंडल स्थानीय स्तर के कार्यकर्ता रहे, जिन्होंने जनसंघ की विचारधारा- राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और समान विकास को ग्रामीण-आदिवासी बहुल क्षेत्र में ले जाकर लोगों को जोड़ा. 1969 के चुनाव में यह सीट RSP के पास चली गई.
जनसंघ के बाद 1980 में भाजपा का गठन हुआ. बंगाल में भाजपा की यात्रा चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन धीरे-धीरे मजबूत हुई. तपन सिकदर जैसे नेताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. तपन सिकदर दमदम लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे और वाजपेयी सरकार में संचार राज्य मंत्री थे.
बड़े बहुमत की ओर बढ़ती भाजपा
1967 की उस छोटी चिंगारी से लेकर आज 2026 के विधानसभा चुनावों तक भाजपा ने लंबा सफर तय किया है. वर्तमान चुनावी रुझानों और लीड में भाजपा बड़े बहुमत (majority) की ओर मजबूती से बढ़ रही है. 2021 के 77 सीटों से कहीं आगे निकलते हुए भाजपा राज्य में सत्ता बदलाव की मजबूत दावेदार बनकर उभरी है.
यह प्रगति संगठन विस्तार, स्थानीय मुद्दों पर फोकस, विकास एजेंडा और जन-समर्थन का नतीजा है. सुंदरबन जैसे क्षेत्रों से शुरू हुई यात्रा अब पूरे बंगाल में व्यापक समर्थन में बदल चुकी है.
महत्व
- गोपाल चंद्र मंडल बंगाल में जनसंघ/भाजपा के पहले विधायक के रूप में इतिहास में दर्ज हैं.
- यह यात्रा दिखाती है कि विचारधारा और निरंतर संघर्ष से कठिन क्षेत्रों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
- 2026 के चुनाव भाजपा के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकते हैं, जहां वह बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर अग्रसर है.
- बंगाल की राजनीति में वाम-कांग्रेस-तृणमूल के युग में गोपाल चंद्र मंडल की 1967 की जीत एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण शुरुआत थी. आज भाजपा उस नींव पर खड़ी होकर बड़े बहुमत की दिशा में तेजी से बढ़ रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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