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एक फर्जी कोडवर्ड और लुटा स्टेट बैंक! आखिर क्या है नागरवाला की मिस्ट्री जो 5 दशकों से है रहस्यमयी?

Nagarwala Bank Scam 1971: 24 मई 1971 को इंदिरा गांधी की आवाज में आई एक फर्जी फोन कॉल पर एसबीआई से ₹60 लाख गायब किए. आरोपी कैप्टन नागरवाला की गिरफ्तारी, फिर रहस्यमयी मौतों और जांच आयोगों के बावजूद, 5 दशक बाद भी मामला भारतीय इतिहास का अनसुलझा रहस्य बना है.

Nagarwala Bank Scam 1971

Nagarwala Bank Scam 1971

Edited by Shubhra Rai

Nagarwala Bank Scam 1971: 24 मई 1971 को दिल्ली के एसबीआई (SBI) में सिर्फ एक फोन कॉल ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नकली आवाज के झांसे में आकर बैंक के मुख्य कैशियर ने ‘गोपनीय बांग्लादेश मिशन’ के नाम पर एक अनजान व्यक्ति को ₹60 लाख सौंप दिए. यह भारतीय इतिहास की सबसे सनसनीखेज और रहस्यमयी राजनीतिक-बैंकिंग धोखाधड़ी थी.

महज एक फोन कॉल पर इतनी बड़ी रकम का गायब होना और फिर इस केस से जुड़े प्रमुख किरदारों (जांच अधिकारी कश्यप और मुख्य आरोपी नागरवाला) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इस मामले को बेहद पेचीदा बना दिया. साल 1977 में बने रेड्डी आयोग की लंबी जांच के बाद भी यह कभी साफ नहीं हो सका कि इस पूरे खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था. 5 दशक बाद भी यह घोटाला एक अनसुलझा रहस्य है.

नागरवाला बैंक घोटाला: 5 दशक बाद भी अनसुलझा रहस्य

24 मई 1971. दिल्ली में गर्मी चरम पर थी. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संसद मार्ग शाखा में मुख्य कैशियर वेद प्रकाश मल्होत्रा अपनी कुर्सी पर बैठे दिन की शुरुआत कर रहे थे. ठीक 11:45 बजे उनके फोन की घंटी बजी. उस कॉल ने न सिर्फ उनकी जिंदगी, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया.

फोन पर प्रधानमंत्री और उनका सचिव

दूसरी तरफ से आवाज आई ‘मैं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का प्रधान सचिव पी.एन. हक्सर बोल रहा हूं’. हक्सर ने बताया कि बांग्लादेश के एक अत्यंत गोपनीय मिशन के लिए तुरंत 60 लाख रुपये की जरूरत है. मल्होत्रा ने जब रसीद या चेक की बात की तो उन्हें बताया गया कि यह अत्यंत गोपनीय मामला है और बाद में रसीद दी जाएगी.

फिर फोन पर आई आवाज ने मल्होत्रा को स्तब्ध कर दिया. ‘मैं इंदिरा गांधी बोल रही हूं. मल्होत्रा बाद में अपनी गवाही में कहेंगे कि इंदिरा गांधी की जानी-पहचानी आवाज सुनते ही उन पर ‘जादू सा’ हो गया. प्रधानमंत्री ने खुद निर्देश दिया ‘मेरा आदमी आएगा. वह ‘बांग्लादेश का बाबू’ कहेगा. आप उसे रकम सौंप दें.’

60 लाख का ट्रांसफर

मल्होत्रा ने तुरंत अपने डिप्टी कैशियर आर.सी. बतरा समेत स्टाफ को बुलाया. 60 लाख रुपये (1971 में आज के करीब 100 करोड़ के बराबर) के बंडल तैयार किए गए. बैंक की एम्बेसेडर कार में पैसे लेकर मल्होत्रा सरदार पटेल मार्ग पहुंचे. वहां एक लंबे-चौड़े, गोरे रंग के व्यक्ति ने कोडवर्ड बोला ‘मैं बांग्लादेश का बाबू हूं’ मल्होत्रा ने बैग थमा दिया.

व्यक्ति ने कहा, ‘प्रधानमंत्री आवास से रसीद ले लीजिएगा’. लेकिन जब मल्होत्रा वहां पहुंचे तो पता चला कि प्रधानमंत्री संसद में हैं. फिर उन्होंने हक्सर से संपर्क किया तो हक्सर ने चौंकाते हुए कहा ‘मैंने कोई फोन ही नहीं किया’.

घोटाले का पर्दाफाश

मल्होत्रा सीधे संसद मार्ग थाने पहुंचे. तत्काल केस दर्ज हुआ. सहायक पुलिस अधीक्षक डी.के. कश्यप और इंस्पेक्टर हरि देव की टीम ने तुरंत एक्शन लिया. टैक्सी नंबर (DLT 1622) के आधार पर रुस्तम सोहराब नागरवाला नामक व्यक्ति को ट्रेस किया गया.

नागरवाला भारतीय सेना का पूर्व कैप्टन था और रॉ (RAW) से भी जुड़ा रहा था. पुलिस ने दिल्ली गेट स्थित पारसी धर्मशाला में उसे गिरफ्तार कर लिया. अधिकांश रकम बरामद हो गई.

रहस्यमयी मौतें

मामला यहां खत्म नहीं हुआ.

  • जांच अधिकारी डी.के. कश्यप की 20 नवंबर 1971 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.
  • नागरवाला को चार साल की सजा हुई, लेकिन 2 मार्च 1972 को तिहाड़ जेल में दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई (पंत अस्पताल में भर्ती थे).
  • मुख्य कैशियर वेद प्रकाश मल्होत्रा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.
  • जांच आयोग और अनिर्णय

 

1977 में जनता पार्टी सरकार बनने के बाद न्यायमूर्ति पी. जगमोहन रेड्डी आयोग गठित किया गया. आयोग ने विस्तृत जांच की, लेकिन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि घोटाले के पीछे कौन था, यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका. किताब The Scam That Shook a Nation: The Nagrawala Scandal (प्रकाश पात्रा और रशीद किदवई) ने इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में लाया.

आज भी सवाल बरकरार

क्या नागरवाला अकेला था? क्या उसकी पृष्ठभूमि (सेना और रॉ का अनुभव) का इस्तेमाल किया गया? फोन पर इंदिरा गांधी और हक्सर की नकल कौन कर सकता था? आवाज की नकल इतनी सटीक कैसे हुई? और सबसे बड़ा सवाल क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति का कारनामा था या उसकी पीछे कोई बड़ी साजिश थी?

54 साल बाद भी नागरवाला बैंक घोटाला भारतीय इतिहास का सबसे रहस्यमय और सनसनीखेज बैंक फ्रॉड बना हुआ है. यह घटना हमें याद दिलाती है कि शक्ति के केंद्र के नाम पर कितनी आसानी से विश्वास किया जा सकता है और कितनी बड़ी रकम एक फोन कॉल में गायब हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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