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यूक्रेन जंग पर अमेरिका का रूख पलटा, UN में पहली बार रूस के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया, इजराइल ने भी दिया साथ

अमेरिका ने यूक्रेन मसले पर रूस के खिलाफ लाए गए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का विरोध किया. पहली बार अमेरिका और इजराइल ने रूस के पक्ष में मतदान किया, जबकि यूरोपीय देशों ने निंदा की. पढिए पूरी खबर-

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यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका का चौंकाने वाला फैसला, UN में रूस के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव का विरोध किया

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

US Votes Against European Allies: रूस-यूक्रेन के सैन्‍य संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज एक अहम बदलाव देखने को मिला. UN में पहली बार, अमेरिका ने यूक्रेनी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जो रूस के हमले की निंदा करने और यूक्रेन से रूसी सेना की तत्काल वापसी की मांग कर रहा था. यह पहली बार था जब अमेरिका ने रूस का समर्थन किया और यूक्रेन के खिलाफ वोट किया. इस वोटिंग में अमेरिका और इजराइल का रूस के पक्ष में मतदान करना यूरोपीय देशों के खिलाफ था.

यूक्रेन का प्रस्ताव और US का चौंकाने वाला कदम

यूक्रेन ने 3 साल तक चल रहे युद्ध की स्थिति में रूस के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें रूस से यूक्रेन में अपनी सेना को वापस बुलाने, न्यायपूर्ण शांति की स्थापना, और युद्ध अपराधों के लिए रूस को जवाबदेह ठहराने की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव को जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों का समर्थन प्राप्त था, जबकि अमेरिका और इजराइल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.

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भारत-चीन ने मतदान में नहीं लिया हिस्सा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाए गए प्रस्‍ताव से जुड़ी एक खास बात यह भी है कि भारत और चीन समेत 65 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. प्रस्ताव को 93 वोटों के साथ पारित किया गया, जबकि 18 देशों ने इसका विरोध किया.

अमेरिका का नया दृष्टिकोण, युद्ध की निंदा से इनकार

अमेरिका ने UN में एक नया प्रस्ताव पेश किया जिसमें न तो रूस के हमले का जिक्र था और न ही किसी प्रकार की निंदा की गई थी. अमेरिकी प्रस्ताव में बस दोनों देशों के बीच हुए जान-माल के नुकसान पर शोक व्यक्त किया गया. अमेरिका ने कहा कि वह युद्ध को जल्द खत्म करने और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में काम करना चाहता है.

अमेरिकी डिप्लोमैट डोरोथी कैमिली शिया ने इस प्रस्ताव के बारे में कहा कि ऐसे प्रस्ताव युद्ध को रोकने में नाकाम रहे हैं. उनका कहना था कि यह युद्ध अब बहुत लंबा खिंच चुका है और इससे न केवल यूक्रेन और रूस बल्कि अन्य जगहों पर भी लोग प्रभावित हो रहे हैं.

Donald Trump

यूरोपीय देशों की अमेरिका से नाराजगी

यूक्रेनी प्रस्ताव को यूरोपीय देशों का समर्थन मिला था, और उनके लिए यह स्थिति निराशाजनक रही कि उनके पुराने सहयोगी अमेरिका ने उनके खिलाफ वोट किया. यूरोपीय डिप्लोमैट्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि वे इस बदलाव से नाराज हैं. यह यूरोपीय देशों और अमेरिका के रिश्तों में तनाव का कारण बन सकता है.

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच जुबानी तकरार

यह बदलाव उस समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच जुबानी जंग चल रही थी. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जेलेंस्की को एक मामूली कॉमेडियन और बिना चुनाव वाला तानाशाह कहा था. जेलेंस्की ने ट्रंप के इस बयान का जवाब देते हुए कहा था कि वह गलत जानकारी के साथ और गलतफहमी में जी रहे हैं.

Volodymyr Zelensky

ट्रंप ने यूक्रेन को दी गई वित्तीय मदद को वापस मांगते हुए कहा था कि वह चाहता है कि यूक्रेन अमेरिका को कुछ रियर अर्थ मिनरल और तेल जैसी चीजें दे, जो अमेरिका को चाहिए. ट्रंप ने कहा, “मैं केवल अपनी मदद के बदले कुछ हासिल करना चाहता हूं.”

इस पर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका से मिली 500 अरब डॉलर की मदद को वह कर्ज नहीं मानते. उन्होंने कहा कि यह मदद थी, जिसे बाइडेन और उन्होंने खुद सहमति के बाद लिया था, और इसे कर्ज नहीं कहा जा सकता.

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