बांग्लादेश में वेतन को लेकर उग्र प्रदर्शन
Bangladesh Protest: बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों का आंदोलन अब और तेज होता दिखाई दे रहा है. न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन श्रमिकों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला. हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था चरमरा गई और एक मेट्रो स्टेशन को भी कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा.
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुई आमने-सामने की भिड़ंत
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 10:15 बजे मीरपुर-11 क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क जाम करने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई. देखते ही देखते माहौल गरमा गया और इलाके में अफरा-तफरी फैल गई.
गलियों से निकलकर पुलिस पर फेंके गए पत्थर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी श्रमिक अलग-अलग गलियों से निकलकर मुख्य सड़क पर पहुंच रहे थे. इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर ईंट-पत्थर भी फेंके. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और कई घंटों तक आवाजाही प्रभावित रही.
सुबह से फैक्ट्रियों के बाहर जमा होने लगे कर्मचारी
मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में श्रमिक अपनी-अपनी फैक्ट्रियों से बाहर निकल आए और कार्यस्थलों के आसपास जुटने लगे. कई समूह नजदीकी गलियों और सड़कों पर भी एकत्र हुए. स्थानीय निवासी यूसुफ अहमद ने बताया कि मीरपुर-10 और मीरपुर-11 के बीच स्थित कई कारखानों के पुरुष और महिला कर्मचारी सुबह से ही फैक्ट्रियों के बाहर जमा थे और स्थिति पर नजर बनाए हुए थे.
आंदोलनकारियों की क्या हैं मुख्य मांगें?
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की प्रमुख मांग न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर 30 हजार टका करना है. इसके अलावा वे श्रमिकों की कथित ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगाने और कर्मचारियों की छंटनी बंद करने की भी मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मौजूदा वेतन बढ़ती महंगाई के बीच पर्याप्त नहीं है और श्रमिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा की जरूरत है.
10 घायल, 264 परिधान कारखानों में काम बंद
श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई झड़पों में अब तक कम से कम 10 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. वहीं, विभिन्न इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद एहतियातन 264 कपड़ा कारखानों में सामान्य अवकाश घोषित कर दिया गया है. इससे उत्पादन गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैला विरोध प्रदर्शन
न्यूज एजेंसी यूएनबी की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज जैसे प्रमुख औद्योगिक इलाकों में सोमवार को हजारों श्रमिक सड़कों पर उतर आए थे. इन क्षेत्रों में भी आंदोलन का असर साफ दिखाई दिया और कई इकाइयों में कामकाज बाधित रहा.
सरकार ने बनाया वेतन बोर्ड
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बांग्लादेश सरकार ने रविवार को न्यूनतम वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा की थी. सरकार का कहना है कि श्रमिकों की मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है.
प्रधानमंत्री ने दी सख्त चेतावनी
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक ओर श्रमिकों के हित सुरक्षित रहें, वहीं दूसरी ओर परिधान उद्योग का उत्पादन और निर्यात प्रभावित न हो. उन्होंने साफ कहा कि श्रमिक आंदोलन की आड़ में हिंसा, तोड़फोड़ और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
श्रम मंत्री की अपील भी नहीं आई काम
श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी. उन्होंने सड़क पर प्रदर्शन की जगह बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया. हालांकि, उनकी अपील के बावजूद श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा.
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निर्यात पर पड़ सकता है असर
बांग्लादेश का परिधान उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है. ऐसे में गाजीपुर, सावर-अशुलिया, नारायणगंज और मीरपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन ठप पड़ने तथा फैक्ट्रियों के बंद रहने से कपड़ा निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. उद्योग जगत की नजर अब सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच संभावित समाधान पर टिकी हुई है.
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