EU Vs Trump Tariff War
EU Vs Trump Tariff War: डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से ही यूरोपीय देशों पर लगातार हमलावर रहे हैं. अब एक बार फिर उन्होंने EU पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने EU पर व्यापार समझौता उल्लंघन का आरोप लगाया है. जिसके बाद अब यूरोपीय यूनियन भी आर-पार के मूड में दिख रहा है.
शनिवार को यूरोपीय यूनियन ने कहा कि यदि अमेरिका व्यापार समझौते के विपरीत कोई भी कदम उठाता है, तो इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे. वो अपने हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों को खुला रखेगा.
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ से अमेरिका में आयात होने वाले कारों और ट्रकों पर एक बार फिर 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का ऐलान कर दिया है.
हम अपने हितों की करेंगे रक्षा
समाचार एजेंसी सिन्हुआ से बात करते हुए यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि हम अमेरिका के साथ स्थिर और दोनों के लिए फायदेमंद संबंध बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन अगर अमेरिका तय किए गए समझौते के मुताबिक नहीं चलता है, तो हम अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय संघ पिछले साल हुए समझौते के मुताबिक अपने वादों को सामान्य प्रक्रिया के तहत पूरा कर रहा है और इस बारे में अमेरिका को लगातार जानकारी भी दी जा रही है. साथ ही, ब्रसेल्स अमेरिका से यह भी साफ-साफ जानना चाहता है कि वह समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां कैसे निभाएगा.
पिछले साल हुआ था समझौता
बता दें कि पिछले साल हुए EU-अमेरिका व्यापार समझौते के दौरान यूरोपीय संघ ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर लगे टैरिफ निलंबित करने और कृषि-खाद्य उत्पादों पर टैरिफ रेट कोटा लागू करने पर सहमति जताई थी. इसके बदले में अमेरिका की तरफ से यूरोपीय उत्पादों पर लगाये गए भारी उत्पाद शुल्क को घटाकर 15 प्रतिशत करने का वादा किया गया था.
इसी को लेकर शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यूरोपीय संघ मौजूदा व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है. जिसके चलते अब यूरोपीय संघ से अमेरिका आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है.
यूरोपीय देश नहीं कर रहे समझौते का पालन
उन्होंने कहा कि हमने यह टैरिफ इसलिए बढ़ाया है क्योंकि यूरोपीय देश हमारे व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहे थे. EU पर टैरिफ लगाया जाना यह अमेरिका के लिए फायदे का सौदा है. इससे ना सिर्फ अमेरिका में अरबों डॉलर आएंगे, बल्कि कंपनियां अपनी उत्पादन यूनिट अमेरिका में स्थानांतरित करने पर मजबूर हो जाएंगी.
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस कदम को ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का ही एक प्रारूप बताया है. उन्होंने कहा कि इससे ना सिर्फ दुनिया की बड़ी वाहन निर्माता कंपनियां अमेरिका में निवेश करने के लिए बाध्य होंगी, बल्कि इससे रोजगार भी बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका में फिलहाल 100 अरब डॉलर से अधिक के ऑटो प्लांट्स बन रहे हैं. जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
-भारत एक्सप्रेस
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