India Ukraine Diesel Trade: रूस-यूक्रेन के सैन्य टकराव के बीच भारत यूक्रेन को सबसे ज्यादा डीजल सप्लाई करने वाला देश बनकर उभरा है. इसी साल जुलाई में भारत ने यूक्रेन की कुल डीजल जरूरतों का 15.5% हिस्सा पूरा किया. यह आंकड़ा पिछले साल जुलाई 2024 में मात्र 1.9 प्रतिशत था.
यूक्रेन की ऑयल मार्केट एनालिटिक्स फर्म नाफ्टोरिनोक के अनुसार, हर दिन औसतन 2,700 टन डीजल निर्यात करके भारत यूक्रेन का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है. यह विकास ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा व्यापार में जटिलताएं बढ़ रही हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की यह भूमिका कूटनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है.
अमेरिकी टैरिफ और रूसी तेल का कनेक्शन
इस उछाल का एक प्रमुख कारण भारत का रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है, और रूस उसका सबसे बड़ा सप्लायर बन चुका है, जो भारत की कुल तेल जरूरतों का 35-40 प्रतिशत पूरा करता है. हालांकि, अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात पर 50 प्रतिशत पनिशटिव टैरिफ लगा दिया है. इसका उद्देश्य रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा. दो सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ये लंबे समय के अनुबंध हैं, जिन्हें अचानक रोकना संभव नहीं है. भारत का तर्क है कि सस्ता रूसी तेल खरीदने से न केवल उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिली है.

भारत ने रूस से खरीदकर यूक्रेन को बेचा तेल
यह स्थिति वैश्विक कूटनीति की जटिलताओं को उजागर करती है. एक तरफ भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी तेल से बना डीजल यूक्रेन की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है. हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी. इस बातचीत के ठीक बाद यह खबर आई है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों को दर्शाती है. भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का यह कदम अमेरिका और यूरोप की नीतियों के अनुरूप है, क्योंकि सस्ता रूसी तेल खरीदकर वैश्विक कीमतों को बढ़ने से रोका गया है.
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ट्रम्प का आरोप: भारत के पैसे से रूस झुक नहीं रहा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन जैसे देशों पर आरोप लगाया है कि वे रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसकी युद्ध मशीन को फंडिंग दे रहे हैं. ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका भारत पर दबाव बढ़ा रहा है. हालांकि, भारत ने इसका जवाब देते हुए कहा कि रूस से तेल खरीदना उसके उपभोक्ताओं को किफायती ईंधन उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है. भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय आर्थिक हितों पर आधारित है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है. ट्रम्प के बयान ने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी तेल खरीदने के लिए भी तैयार है, बशर्ते रूसी आयात को पूरी तरह बंद न करना पड़े.

अमेरिकी टैरिफ: चीन को कोई सजा क्यों नहीं?
अमेरिकी टैरिफ ने भारत को निशाना बनाया है, जबकि रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार चीन है, लेकिन उस पर कोई पेनल्टी नहीं लगाई गई. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि चीन पर सजा लगाने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगी. भारत ने इस भेदभाव पर सवाल उठाया है और कहा कि अमेरिका की नीति असंतुलित है. भारत के विदेश सचिव ने हाल ही में कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत जारी है. भारत का मानना है कि रूस से तेल आयात बंद करना उसके लिए आर्थिक रूप से असंभव है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.
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