Rajnath Singh on Tariff Row: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी टैरिफ विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता, केवल स्थायी हित होते हैं. यह बात रक्षा मंत्री ने एनडीटीवी के डिफेंस समिट 2025 में शनिवार को कही.
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और जनता के कल्याण से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ नीतियों के कारण वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बनी हुई है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विकसित देशों की बढ़ती संरक्षणवादी नीतियों पर चिंता जताई और कहा कि भारत किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन अपने किसानों, छोटे व्यापारियों और देशवासियों के हितों की रक्षा करेगा.
भारत, रूस और चीन के बीच सहयोग बढ़ा
राजनाथ सिंह के इस बयान को भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ते सहयोग से जोड़कर देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान से चीन के दौरे पर रवाना हो चुके हैं, जहां वे एससीओ समिट में चीनी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे. राजनाथ ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध जैसे हालात हैं, लेकिन भारत दबाव में नहीं झुकेगा. उन्होंने जोर दिया कि हमारे लिए अपने लोगों का हित सर्वोपरि है. इस संदर्भ में, भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की खबरें आ रही हैं, लेकिन राजनाथ ने स्पष्ट किया कि संबंध हितों पर आधारित होते हैं.
भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड वृद्धि
समिट में राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा क्षमताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि दुनिया भारत की सेनाओं की क्षमता की गवाही दे रही है. 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 700 करोड़ रुपये से कम था, जो अब बढ़कर 24 हजार करोड़ रुपये हो गया है. यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन रहा है. राजनाथ ने पाकिस्तान पर सटीक हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मिशन दूरदर्शिता और तैयारी के बिना सफल नहीं हो सकते. स्वदेशी उपकरणों के उपयोग से भारतीय सेनाओं ने अपनी ताकत साबित की है.
वायुसेना की भूमिका और सीजफायर होना
समिट में वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को युद्धविराम की मेज पर लाने के लिए भारतीय वायुसेना ने 50 से भी कम हथियार दागे. उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन उसे खत्म करना उतना ही मुश्किल. तिवारी ने जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति निरंतर जारी है, और ऐसे समिट से नई दिशाएं मिलती हैं. कुल मिलाकर, राजनाथ सिंह का बयान भारत की विदेश नीति की मजबूती को रेखांकित करता है, जहां राष्ट्रीय हित सर्वोच्च हैं.
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