भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. दोनों देशों के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मंगलवार से लागू हो गया है. इस समझौते से भारतीय कारोबारियों, किसानों, छोटे उद्योगों और रोजगार देने वाले क्षेत्रों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिलेगा. भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड में 100 फीसदी शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी. हालांकि, डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखकर उनके हितों की सुरक्षा की गई है.
छोटे कारोबारियों और किसानों को मिलेगा फायदा
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को बिना आयात शुल्क के न्यूजीलैंड के बाजार में पहुंच मिलने से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नए अवसर बनेंगे. इसका फायदा किसानों, महिलाओं, युवाओं और उन उद्योगों को भी मिल सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है.
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस समझौते से भारतीय पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे. साथ ही, भारत के अहम आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है.
कृषि क्षेत्र की बात करें तो भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और दूसरे कृषि उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में बेचने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं. सरकार को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से खेती में उत्पादकता सुधारने, किसानों की आमदनी मजबूत करने और उनकी आजीविका बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
डेयरी क्षेत्र को समझौते से बाहर रखा गया
इस समझौते में जहां कई क्षेत्रों के लिए नए रास्ते खुले हैं, वहीं सरकार ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सावधानी भी बरती है. पीयूष गोयल ने साफ किया कि डेयरी समेत उन क्षेत्रों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है, जिन पर व्यापार समझौते का असर पड़ सकता था. यानी बाजार खोलने के साथ घरेलू किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी गई है.
गोयल ने विजयादशमी के अवसर पर कहा कि भारत और न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझेदारी के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. उन्होंने इस समझौते के लागू होने को दोनों देशों के लिए जीत की शुरुआत बताया.
‘मेड इन इंडिया’ मशीनों की भी बढ़ेगी पहुंच
इस समझौते का असर सिर्फ कृषि उत्पादों या छोटे कारोबार तक सीमित नहीं है. भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी इसमें संभावनाएं देखी जा रही हैं. पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र के पुणे में बनी पहली जेसीबी मशीन को न्यूजीलैंड भेजने के लिए हरी झंडी दिखाई. उन्होंने कहा कि अब न्यूजीलैंड में भी ‘मेड इन इंडिया’ जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल होगा.
यह कदम भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में अपनी जगह बनाने का अच्छा अवसर है. अगर भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो इसका फायदा उत्पादन, कारोबार और रोजगार से जुड़े लोगों तक भी पहुंच सकता है.
निवेश और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौते का मकसद केवल आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क को कम करना नहीं है. ऐसे समझौते दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन को मजबूत करते हैं. इससे कंपनियों को कारोबार बढ़ाने और नए बाजारों में काम करने में आसानी होती है.
उन्होंने कहा कि एफटीए का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक साझेदारी बनाना है. इसके साथ ही नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया आसान होने और कारोबार करने में आने वाली अड़चनें कम होने की भी उम्मीद है.
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते से कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का रास्ता खुल सकता है. सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत होंगे और आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
आईटी, दवा और सेवा क्षेत्र को भी फायदा
भारत के सेवा क्षेत्र के लिए भी यह समझौता अहम माना जा रहा है. सूचना प्रौद्योगिकी (IT), पेशेवर सेवाओं, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड में कारोबार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं.
इसके अलावा, भारतीय दवा कंपनियों और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों के लिए भी बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है. समझौते के तहत न्यूजीलैंड वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों की ओर से जारी निरीक्षण संबंधी मंजूरियों को स्वीकार करेगा. इससे कंपनियों को बार-बार अनुपालन की प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम पड़ सकती है और उनके उत्पादों को बाजार में पहुंचाने में लगने वाला समय घट सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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