US- Iran war impact: ईरान को लेकर जारी संघर्ष का असर अब अमेरिका के हथियार भंडार पर भी दिखने लगा है. अमेरिकी सांसदों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि लगातार बढ़ते सैन्य उपयोग से वैश्विक सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो रहा है तथा परमाणु जोखिम भी बढ़ सकता है.
सीनेट की विदेश संबंध समिति की हालिया सुनवाई में ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति और हथियार नियंत्रण की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए गए. इस दौरान रैंकिंग सदस्य सीनेटर जीन शाहीन ने कहा कि तेजी से हो रहे हथियारों के उपयोग ने अमेरिका की रणनीतिक योजना और तैयारी में मौजूद कमजोरियों को उजागर किया है.
यूक्रेन युद्ध पर पड़ रहा असर
जीन शाहीन के मुताबिक, “पिछले गुरुवार को ईरान के खिलाफ इस युद्ध के लगभग तीन सप्ताह बाद प्रशासन ने 16 अरब डॉलर से अधिक के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी. इसके लिए सामान्य संसदीय समीक्षा को दरकिनार करते हुए आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया.” उन्होंने मौजूदा हालात को “गोलाबारूद और हथियारों की आपात स्थिति” बताया और कहा कि अमेरिकी हथियार भंडार तेजी से कम हो रहे हैं. उनके मुताबिक कई मामलों में स्थिति यह है कि जरूरत के मुकाबले सिर्फ करीब एक-चौथाई इंटरसेप्टर ही उपलब्ध हैं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ईरान संघर्ष का अंतिम उद्देश्य क्या है, यह अब तक स्पष्ट नहीं है.
इसके प्रभाव दूसरे युद्धों पर भी देखने को मिल रहे हैं. यूक्रेन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका की मदद अब पहले जैसी स्थिर और अनुमानित नहीं रह गई है, जिससे सहयोगी देश हथियारों की कमी पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. शाहीन ने यह भी बताया कि यूक्रेन में अब 80 प्रतिशत से ज्यादा हमले ड्रोन के जरिए हो रहे हैं, जो आधुनिक युद्ध में स्वचालित सिस्टम और ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल की ओर इशारा करता है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की ओर से इस तरह की मदद की रफ्तार अभी भी जरूरत के हिसाब से काफी कम है.
कम हो रहे अमेरिका के हथियारा
हालिया रिपोर्टों में चिंता जताई गई है कि अमेरिका के पास मौजूद आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों का भंडार तेजी से कम हो रहा है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका एक साथ कई संघर्षों को लंबे समय तक संभाल पाएगा. सीनेटर जिम रिश, जो कमेटी के चेयरमैन हैं, सरकार के रुख का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़ा संघर्ष केवल एक अलग मामला नहीं है, बल्कि इसे एक बड़ी रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, मध्य पूर्व में हुई सैन्य कार्रवाइयों से यह साफ हुआ है कि अमेरिका को अपने नागरिकों को तुरंत खतरों से बचाने के लिए तैयार रहना होगा.
रिश ने यह भी कहा कि दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच गई है जहां कई शक्तिशाली देश परमाणु ताकत के साथ सामने हैं. इसमें रूस और चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी शामिल हैं, साथ ही कुछ ऐसे देश भी हैं जिनकी परमाणु क्षमता को लेकर चिंता है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पुराने परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते अब मौजूदा हालात के लिए पर्याप्त नहीं हैं. उनका कहना था कि अगर दूसरे देश अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहे हैं, तो अमेरिका को भी अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर बढ़ाने की तैयारी रखनी चाहिए.
हथियारों व मिसाइल की जरूरत बढ़ी
हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अंडर सेक्रेटरी थॉमस डिनानो ने सांसदों को बताया कि प्रशासन ऐसे समझौतों पर काम कर रहा है जिन्हें ठीक से जांचा और लागू किया जा सके, ताकि अमेरिका की सुरक्षा मजबूत हो. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पुराने हथियार नियंत्रण समझौते अब वर्तमान हालात के अनुसार उपयोगी नहीं रह गए हैं, क्योंकि वे उस समय की सुरक्षा परिस्थितियों पर आधारित थे. उनका कहना था कि ये पुराने ढांचे आज की चुनौतियों, खासकर चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से संबोधित नहीं करते.
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सांसदों ने भी चिंता जताई कि हथियार नियंत्रण की बातचीत लगभग रुक गई है. सीनेटर जेनी शाहीन ने कहा कि चीन को इन वार्ताओं में शामिल करने में कठिनाई आ रही है, जिससे प्रगति प्रभावित हो रही है. उन्होंने रूस से जुड़े खतरों का भी उल्लेख किया, जैसे नाटो के पास परमाणु हथियारों की गतिविधियां और ऐसे नए हथियार सिस्टम जिनकी निगरानी करना मुश्किल है. इसके अलावा, चीन द्वारा 300 से अधिक नए मिसाइल साइलो बनाने और बिना ज्यादा पारदर्शिता के अपने परमाणु हथियार बढ़ाने पर भी चिंता जताई गई. यह सुनवाई ऐसे समय हुई है जब ईरान को लेकर अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के कारण दुनिया में तनाव बढ़ा हुआ है और उन्नत हथियारों व मिसाइल रक्षा प्रणालियों की जरूरत भी ज्यादा महसूस की जा रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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