Middle East war 2026 US Israel Iran impact: मिडल-ईस्ट में 28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चले भीषण महायुद्ध का 40 दिनों बाद थमने का ऐलान हो चुका है. लेकिन यह युद्ध अपने पीछे तबाही का ऐसा मंजर छोड़ गया है जिसे भरने में दशकों लग जाएंगे. इस जंग ने न केवल हजारों जानें लीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिलाकर रख दिया. यही नहीं ‘कयामत’ के इन 40 दिनों में मौत का आंकड़ा 3800 को पार कर गया है और बेघर होने वालों की संख्या तो लाखों में है.
युद्ध में मौत का खौफनाक आंकड़ा क्या?
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों पर हवाई हमले शुरू किए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह संघर्ष इतना खूनी होगा. आईए जानते हैं मौत की इस खूनी जंग ने किस देश में मचाई कितनी तबाही:
ईरान: सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ, जहां 2000 से अधिक लोगों की मौत हुई और 26,500 से ज्यादा लोग घायल हुए.
लेबनान: हिजबुल्लाह और इजरायल की जंग के बीच लेबनान में 1497 लोगों ने जान गंवाई.
इजरायल व अमेरिका: इजरायल में 26 और अमेरिकी सेना के 13 जवान इस युद्ध की भेंट चढ़ गए.
खाड़ी देश व अन्य: कुवैत, यूएई और इराक समेत अन्य खाड़ी देशों में भी करीब 150 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं.
खंडहर बने शहर: 90 हजार घर और 760 स्कूल तबाह
युद्ध की आग ने केवल सैनिकों को ही नहीं बल्कि आम नागरिकों के आशियानों को भी राख कर दिया. आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 90,000 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए. इसके अलावा 760 स्कूल और 307 अस्पताल या तो बमबारी में पूरी तरह नष्ट हो गए या इस्तेमाल के लायक नहीं बचे. हजारों फैक्ट्रियां, बाजार और व्यावसायिक इमारतें मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं.

अमेरिका को कैसे भारी पड़ा युद्ध?
दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के लिए यह जंग आर्थिक रूप से बेहद महंगी साबित हुई.
सैन्य खर्च: अमेरिका ने इस 40 दिन की जंग में कुल 3.5 लाख करोड़ रुपये फूंक दिए. इसमें से 94,000 करोड़ रुपये तो केवल शुरुआती 6 दिनों में ही खर्च हो गए थे.
तकनीकी क्षति: ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका के आधुनिक रडार सिस्टम, F-15E लड़ाकू विमान और AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमानों को भारी क्षति पहुंची है.
आर्थिक संकट ने कैसे बढ़ाई दुनियां की टेंशन?
जंग का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा. कच्चे तेल की कीमतें जो युद्ध से पहले 69 डॉलर प्रति बैरल थीं, वे रॉकेट की तरह बढ़कर 114 डॉलर तक पहुंच गईं.
LNG संकट: कतर के रास लाफान में हुए हमले से दुनिया के 17 फीसदी LNG उत्पादन पर बुरा असर पड़ा, जिससे गैस की किल्लत पैदा हो गई.
GDP को चोट: अनुमान है कि इस जंग की वजह से खाड़ी देशों की जीडीपी (GDP) को 194 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हो सकता है.
भारतीय बाजार: युद्ध के डर से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 60,655 करोड़ रुपये निकाल लिए, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा.
शांति की उम्मीद के बीच गहरे जख्म
भले ही अब कूटनीतिक प्रयासों और सीजफायर के बाद मिसाइलों का शोर थम गया है लेकिन 40 दिनों की इस तबाही ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में जीत किसी की नहीं होती. ईरान की सड़कों पर बिखरा मलबा, लेबनान के उजड़े अस्पताल और तेल की बढ़ती कीमतों ने पूरी मानवता को एक गहरे संकट में डाल दिया है. अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह संघर्ष विराम वास्तव में स्थायी शांति में बदल पाएगा या यह केवल अगली बड़ी तबाही से पहले की खामोशी है.
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