Bharat Express DD Free Dish

‘बिजनेस ग्रेवयार्ड’ बना पाकिस्तान! भाग रही हैं Microsoft, Uber और Yamaha जैसी कंपनियां, जानें क्यों?

Foreign Companies Exit Pakistan: माइक्रोसॉफ्ट ने महीने भर पहले पाकिस्तान में अपना दुकान समेट लिया. इसके बाद यामाहा और फिर हालिया अपडेट में प्रॉक्टर एंड गैंबल भी पाकिस्तान से निकल गई.

Foreign Companies Exit Pakistan

Foreign Companies Exit Pakistan: कंगाल पाकिस्तान को ताबड़तोड़ झटके लग रहे हैं. बड़ी-बड़ी कंपनियां पाकिस्तान से अपना बिजनेस समेटकर निकल रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बाहर जाने को लेकर इस्लामाबाद में चिंता बढ़ रही है. भ्रष्टाचार, आतंकवाद और नियामक बाधाओं ने इन कंपनियों के लिए देश में काम करना मुश्किल बना दिया है.

पाकिस्तान मीडिया डॉन की एक रिपोर्ट में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के देश छोड़ने का जिक्र किया गया है. बता दें कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है. यहां 24 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं, इसके बावजूद ये कंपनियां देश छोड़ रही हैं.

माइक्रोसॉफ्ट ने समेटा अपना दुकान

दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने महीने भर पहले पाकिस्तान में अपना दुकान समेट लिया. इसके बाद यामाहा और फिर हालिया अपडेट में प्रॉक्टर एंड गैंबल भी पाकिस्तान से निकल गई. इसके अलावा शेल (एलएनजी की ओर वैश्विक झुकाव के तहत खुदरा ईंधन से बाहर निकलना), उबर और फाइजर ने भी पाकिस्तान को टाटा बाय-बाय बोल दिया.

आर्थिक अस्थिरता के चलते पाकिस्तान डांवाडोल

इसका मुख्य कारण आर्थिक अस्थिरता, अनियंत्रित मुद्रास्फीति, मुद्रा अवमूल्यन, नीतिगत अराजकता और सुरक्षा संबंधी मुद्दों जैसी व्यापक चिंताएं हैं. प्रमुख वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञ यूसुफ नजर के अनुसार, इसका मुख्य कारण बाजार की दीर्घकालिक क्षमता का आकलन है.

ये भी पढ़ें- ‘यूं ही नहीं भारतीय सेना को हनुमान कहते हैं’, भूटान में आर्मी जवानों ने किया कमाल

कंपनियां दुबई हो रही स्थानांतरित

विश्लेषकों का कहना है कि कुछ कंपनियों का बाहर जाना वैश्विक रणनीतियों का हिस्सा है. कुछ कंपनियां बेहतर आर्थिक पैमाने के लिए दुबई या सिंगापुर जैसे क्षेत्रीय केंद्रों में स्थानांतरित हो सकती हैं. ये फैसले अभी भी पाकिस्तान के कारोबारी माहौल में “अविश्वास प्रस्ताव” को दर्शाते हैं, जहां भारी कर मुनाफे को कम करते हैं और मुनाफे की वापसी में बाधा डालते हैं.

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस प्रवृत्ति में सीधे पलायन के बजाय स्वामित्व परिवर्तन शामिल है, जिसमें सऊदी अरामको, गनवोर ग्रुप और बैरिक गोल्ड (खनन में 9 अरब डॉलर का निवेश) जैसे नए प्रवेशकर्ता अंतराल को भरने के लिए आगे आ रहे हैं.

– भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read