PM Modi In Prambanan Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. इस अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उनके साथ मौजूद रहे. दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा शुरू की जाने वाली संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजना की आधारशिला स्वरूप एक विशेष पट्टिका का अनावरण किया.
यह दौरा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को नई ऊर्जा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी साबित हुआ. प्रम्बानन मंदिर परिसर दोनों देशों की साझा विरासत और ऐतिहासिक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक माना जाता है.
आज भी कायम है भारतीय संस्कृति की छाप
प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था और इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है. यह मंदिर त्रिमूर्ति—भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है. मंदिर की स्थापत्य कला, शिल्पकला और धार्मिक प्रतीक भारतीय संस्कृति के उस प्रभाव को दर्शाते हैं जिसने सदियों पहले दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी गहरी पहचान बनाई थी.
President Prabowo Subianto and I inaugurated the UNESCO World Heritage Prambanan Temple Compound Restoration and Conservation Project. This initiative is a shining example of the enduring civilisational bonds between India and Indonesia, rooted in a shared heritage that has… pic.twitter.com/Fy8FoBvJ8X
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
मंदिर परिसर में मौजूद भव्य संरचनाएं यह बताती हैं कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान केवल व्यापार तक सीमित नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक और सभ्यतागत स्तर पर भी दोनों समाजों के बीच गहरा संबंध रहा है.
2025 में हुई सहमति अब जमीन पर उतरी
प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन की यह पहल उस सहमति का परिणाम है जो राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की 2025 की भारत यात्रा के दौरान बनी थी. उस समय दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर के संरक्षण के लिए भारत की विशेषज्ञता और सहयोग का उपयोग करने पर चर्चा की थी. अब उसी समझ को आगे बढ़ाते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम शुरू करेगा.
इस परियोजना का उद्देश्य मंदिर परिसर की मूल संरचना, कलात्मक विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को संरक्षित करना है.
दक्षिण-पूर्व एशिया में विरासत संरक्षण का लंबा अनुभव
भारत ने पिछले वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशिया के कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को प्राचीन स्मारकों के संरक्षण और पुनर्स्थापन का व्यापक अनुभव है. इंडोनेशिया में भी एएसआई पहले बोरोबुदुर मंदिर परिसर के विस्तृत दस्तावेजीकरण का कार्य कर चुका है.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रम्बानन मंदिर परियोजना भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग का नया अध्याय साबित हो सकती है. इससे न केवल विरासत संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी और मजबूत होगा.
सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त उदाहरण
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो का संयुक्त रूप से मंदिर परिसर का दौरा यह संदेश देता है कि आधुनिक वैश्विक साझेदारियों में सांस्कृतिक विरासत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. भारत द्वारा प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में दिया जा रहा सहयोग केवल तकनीकी सहायता नहीं है, बल्कि साझा इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है.
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प्रम्बानन मंदिर परिसर में शुरू हुई यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ एशिया की साझा सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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