संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का सख्त और बेबाक कूटनीतिक अंदाज एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है. एक बैठक के बाद जब एक पाकिस्तानी रिपोर्टर ने आतंकवाद का बेबुनियाद राग अलापते हुए उन्हें घेरने (हैकल करने) की कोशिश की, तो जयशंकर ने तीखा पलटवार करते हुए दो टूक कहा: “एक आतंकी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है.” (A terrorist country is asking me that question). उनके इस सधे हुए जवाब के बाद सवाल पूछने वाला बगले झांकता नजर आया और कमरे में सन्नाटा छा गया.
जयशंकर साहब on 🔥 🔥 in UNGA
प्रोपगैंडा वाले पत्रकार को धो डाला 👏👏 pic.twitter.com/Eiprx1tnoK
— Baliyan (@Baliyan_x) September 25, 2026
व्यापारिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हमले चिंताजनक
इससे पूर्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की उद्घाटन बैठक को संबोधित करते हुए लाल सागर, काला सागर और खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर लगातार हो रहे हमलों पर वैश्विक समुदाय को चेताया. भारत और लाइबेरिया ने मिलकर दुनिया के प्रमुख शिप-ओनिंग और नाविक आपूर्ति करने वाले देशों को इस मंच पर एकजुट किया है.
डॉ. जयशंकर ने बताया कि महज दो दिन पहले ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के ध्वज वाले बल्क कैरियर ‘एमवी केप डोव’ पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की दुखद मौत हो गई. वहीं इससे 10 दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में पनामा-ध्वज वाले तेल टैंकर ‘अल गया’ पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय चालक दल का सदस्य लापता हो गया. इसके अलावा उन्होंने 18 जुलाई को रूसी जलक्षेत्र में ‘एमवी ओमोर्फ़ी’ पर हमले में चीफ ऑफिसर (भारतीय नागरिक) की मौत और अगले ही दिन ओडेसा से रवाना हुए जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ पर हमले में चार भारतीय नाविकों की जान जाने का भी उल्लेख किया.
‘जहाजों पर हमले किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं’
विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिक जहाजों और निर्दोष नाविकों पर ऐसे कायरतापूर्ण हमले बिल्कुल अक्षम्य और गैर-न्यायोचित हैं.
उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए रेखांकित किया:
- दुनिया भर में दैनिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार 140 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसका 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समुद्री मार्गों से संचालित होता है.
- मर्चेंट नेवी के बेड़े में लगभग 20 लाख नाविक अपनी सेवाएं देते हैं.
- जहाजों पर लंबे समय तक कैद रहने, परिवार से दूर रहने, चालक दल बदलने में देरी और मनोवैज्ञानिक तनाव झेलने वाले इन नाविकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना संभव नहीं है.
भारत द्वारा की जा रही अगुवाई
डॉ. जयशंकर ने याद दिलाया कि दो सप्ताह पूर्व भारत द्वारा आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्री अधिकारियों और दूतावासों को जोड़ने वाले ‘सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ का प्रस्ताव रखा था, ताकि संकट के समय त्वरित मेडिकल सहायता, बचाव अभियान और परिजनों को सूचना पहुंचाई जा सके.
भारत दुनिया में सबसे बड़े मर्चेंट नेवी क्रू सप्लायरों में से एक है, इसलिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से लेकर वैश्विक मंचों तक नाविकों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी तंत्र बनाने की पुरजोर वकालत की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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