Marco Rubio On US-India Relation: “हम पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बढ़ाने का अवसर देख रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत भारत के साथ हमारी ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दोस्ती नहीं होगी” ये कहना है अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का. दरअसल 26 अक्टूबर को मलेशिया की राजधानी कुआलालमपुर में एक महत्वपूर्ण राजनयिक बैठक से पहले अमेरिका के विदेश मंत्री मीडिया के साथ बातचीत की. जिसमें उन्होंने कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को गहराई देना चाहता है, लेकिन वह इस बात पर मजबूती से जोर देता है कि वह भारत के साथ अपने रणनीतिक गठबंधन को खतरे में नहीं डालेगा.
मलेशिया में आयोजित हो रहे आसियान शिखर सम्मेलन में जाते समय पत्रकारों से अमेरिकी विदेश मंत्री माइको रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के संबंध में कई बातों को साझा किया. उन्होंने वाशिंगटन के पाकिस्तान के साथ नए संबंधों को लेकर उपजी दिल्ली की चिंताओं को स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंध बढ़ाना जरूर चाहते हैं, लेकिन इसकी कीमत भारत के साथ ऐतिहासिक दोस्ती नहीं होगी.
आज जयशंकर से होगी मुलाकात
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 27 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करने वाले हैं. यह बातचीत मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद इलाके में बढ़े सैन्य तनाव के बीच हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनिर के बीच हुई मुलाकात के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव में थोड़ी नर्मी आई थी. जिसपर दोनों दक्षिण एशियाई देशों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थी.
जहां इस्लामाबाद ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए हुए सीजफायर का क्रेडिट दिया था. वहीं भारत ने इसे अस्वीकार्य कर दिया था. भारत ने कहा था कि इस मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी.
भारत कम कर सकता है रूस से तेल खरीद
रूस से तेल खरीद को आधार बनाकर डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा भारत पर लगाये गए भारी-भरकम टैरिफ पर भी मार्को रुबियो ने जवाब दिया. यह पूछे जाने पर कि क्या भारत रूस से तेल का आयात कम कर सकता है, तो रुबियो ने नई दिल्ली से मिले संकेतों की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि भारत अपने तेल पोर्टफोलियो में विविधता लाने में इच्छा व्यक्त की है. अगर वो हमसे ज्यादा तेल खरीदेंगे तो जाहिर है कि किसी और से तेल कम खरीदेंगे.
इस दौरान रुबियो ने भारत की विदेश नीति की सराहना भी की. उन्होंने भारत की वैश्विक साझेदारियों को ना सिर्फ परिपक्व बताया बल्कि व्यावहारिक विदेश नीति का हिस्सा भी बताया. उन्होंने कहा कि उनके ऐसे देशों के साथ संबंध हैं जिनसे हमारे नहीं है. यहीं कूटनीति की प्रकृति भी है.
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भारत के साथ साझेदारी पर नहीं आएगी आंच
अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत की चिंताओं को कम करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हमें कई अलग-अलग देशों के साथ संबंध बनाने होंगे, लेकिन जो हम पाकिस्तान के साथ कर रहे हैं, उससे भारत के साथ अमेरिकी साझेदारी पर कोई आंच नहीं आएगी.
-भारत एक्सप्रेस
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