US Iran talks failure 2026: अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव को खत्म करने की कोशिशें एक बार फिर अविश्वास की भेंट चढ़ती दिख रही हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पिछले हफ्ते हुई 21 घंटे लंबी मैराथन बैठक के बेनतीजा खत्म होने के बाद, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसकी मुख्य वजह दोनों देशों के बीच की गहरी खाई और अविश्वास को बताया है. मंगलवार को ‘टर्निंग पॉइंट अमेरिका’ इवेंट के दौरान वेंस ने स्पष्ट किया कि 47 साल में पहली बार इस स्तर की आमने-सामने की बातचीत हुई, लेकिन दशकों पुराने विवादों को “रातों-रात” हल नहीं किया जा सकता.
इस्लामाबाद में किस बात पर अटका पेंच?(US Iran Talks)
शांति वार्ता (US Iran Talks) की विफलता के पीछे सबसे बड़ी तकनीकी अड़चन परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर रही. सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर 20 साल के मोरेटोरियम (रोक) का प्रस्ताव रखा था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
इसके जवाब में तेहरान ने केवल 5 साल के लिए फ्रीज करने का काउंटर ऑफर दिया. इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों (Axis of Resistance) के समर्थन जैसे मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच ‘मैक्सिमम अप्रोच’ के कारण सहमति नहीं बन पाई.
ट्रंप का नया संकेत: क्या पाकिस्तान में फिर सजेगी मेज?
भले ही पहली कोशिश नाकाम रही हो, लेकिन डिप्लोमेसी के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में बातचीत का दूसरा दौर शुरू हो सकता है. ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख की भूमिका की भी सराहना की है, जो इस बैकचैनल डिप्लोमेसी के केंद्र में बने हुए हैं. जेडी वेंस ने भी उम्मीद जताते हुए कहा कि ईरानी प्रतिनिधि डील करने के इच्छुक दिखे और वे जहाँ अभी हैं, उस स्थिति को लेकर सकारात्मक महसूस कर रहे हैं.
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ऐतिहासिक मुलाकात पर अविश्वास का साया
जेडी वेंस के अनुसार, इस स्तर की बैठक (US Iran Talks) पहले कभी नहीं हुई. लेकिन ईरान की ओर से परमाणु हथियारों को लेकर कोई ‘ठोस प्रतिबद्धता’ न मिलना सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक रुकावट बनी हुई है. वेंस ने साफ कर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखना है और जब तक ईरान इस पर स्पष्ट भरोसा नहीं दिलाता, किसी बड़े समझौते की उम्मीद कम है.
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-भारत एक्सप्रेस
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