Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर 28 जनवरी को सुनवाई

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ बीजेपी नेता प्रवीण शंकर कपूर द्वारा दायर मानहानि मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 28 जनवरी को अपना फैसला सुनाने का निर्णय लिया है.

आतिशी मार्लेना

Atishi Marlena

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

CM Atishi: बीजेपी नेता प्रवीण शंकर कपूर की ओर से दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले दायर पुनर्विचार याचिका पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. विशेष सत्र न्यायाधीश विशाल गोगने ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. 28 जनवरी को फैसला सुनायेगा. सीएम आतिशी ने उनके ख़िलाफ़ जारी समन को चुनौती दी थी.

निदेशालय द्वारा गिरफ़्तार किए जाने की चेतावनी

कपूर ने आरोप लगाया था कि 2 अप्रैल, 2024 को प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान आतिशी के बयान मानहानिकारक थे और इससे उनकी और भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा था. यह मामला आतिशी द्वारा एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान लगाए गए आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा ने उनके एक करीबी सहयोगी के ज़रिए उनसे संपर्क किया था और उनसे अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए कहा था.

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अगर उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ़्तार किए जाने की चेतावनी दी गई थी. आतिशी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करके उन्हें और आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य नेताओं को डराने का प्रयास करने का आरोप लगाया.
उन्होंने यह भी दावा किया कि राघव चड्ढा और सौरभ भारद्वाज सहित अन्य नेताओं पर भी आम चुनावों से पहले इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है.

आतिशी के बयान न  झूठे थे, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी थे

कपूर ने अपनी शिकायत में तर्क दिया कि आतिशी के बयान न केवल झूठे थे, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी थे और उनका उद्देश्य भाजपा और उसके सदस्यों की छवि को धूमिल करना था. उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप, बिना किसी विशेष जानकारी के, भाजपा के मीडिया प्रमुख और दिल्ली इकाई के प्रवक्ता के रूप में उनकी मानहानि के हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता के नेतृत्व में आतिशी की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि बयानों ने भाजपा को एक राजनीतिक इकाई के रूप में लक्षित किया, न कि कपूर को व्यक्तिगत रूप से. उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक मानहानि के मामलों में राजनीतिक दलों से जुड़े सार्वजनिक विमर्श की प्रकृति के कारण सबूतों की उच्च सीमा की आवश्यकता होती है.

ये भी पढ़ें: Waqf Amendment Bill: बजट सत्र में आएगा वक्फ संशोधन बिल? सरकार ने पूरी की तैयारी

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read