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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, सहमति से यौन संबंध और बलात्कार के अपराध में अंतर समझना जरूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर सहमति से यौन संबंध और बलात्कार के अपराध में अंतर समझना जरूरी है. कोर्ट ने एक व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि महिला ने बदले की भावना से झूठा बलात्कार का मामला दर्ज किया था, जबकि उनके बीच संबंध आपसी सहमति से थे.

Delhi High Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कार्यस्थल पर कई बार निकटता के कारण सहमति से यौन संबंध बनते हैं. यह बाद में खराब होने पर बलात्कार जैसे अपराध के रूप में रिपोर्ट किए जाते हैं. इसलिए बलात्कार के अपराध और दो वयस्कों के बीच सहमति से यौन संबंध के बीच अंतर के बारे में जागरूक होना उचित है.

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि बदलते समय में जब महिलाएं उभर रही है और कार्यबल का एक प्रासंगिक हिस्सा बन रही हैं तो उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना और उन्हें लागू करना विधायिका के साथ कार्यपालिका की भी जिम्मेदारी बन जाती है. उसी तरह से अदालत की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह कानूनों की व्याख्या करे और उसे परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक रूप से लागू करे.

कानून का एक संरक्षण वास्तविकता

जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कानून का संरक्षण एक वास्तविकता है, न कि एक कागजी संरक्षण. वैसे अदालतों का एक और कर्तव्य बनता है कि वह एक निगरानीकर्ता की भूमिका निभाएं और किसी भी तरह से उसका दुरु पयोग को रोकने के लिए निष्पक्ष काम करे. जस्टिस ने उक्त टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. उसके खिलाफ सहयोगी महिला ने बलात्कार का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. आरोपी ने कहा था कि वे एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे और रिश्ता आपसी सहमति से बना था.

जब उसे पता चला कि महिला किसी और को भी डेट कर रही है तो उसने उसके साथ सभी संबंध तोड़ लिए. उसके बाद महिला ने बदले की भावना से उसके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई थी. उसका विवाह का वादा कभी झूठा नहीं था. उसने कभी जर्बदस्ती नहीं की.

-भारत एक्सप्रेस



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