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मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 फरवरी को करेगी सुनवाई

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 फरवरी को सुनवाई करेगी.

Supreme Court

मुख्य चुनाव और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 फरवरी को सुनवाई करेगी. एनजीओ एडीआर (ADR) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की पीठ के समक्ष मेंशन किया और कहा कि इस मामले में कल आइटम 41 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, मैं अनुरोध करता हूं कि इसे बोर्ड में पहले नंबर पर लिया जाए. यह हमारे लोकतंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है.

वकील भूषण ने कोर्ट से रजिस्ट्री के लिए आदेश देने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कहा कि कोर्ट रजिस्ट्री का आदेश नहीं दे सकता. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई महत्वपूर्ण मामला नहीं आया तो हम उम्मीद करते हैं कि यह मामला सुनवाई के लिए दिया जाएगा.

नए कानून पर तुरंत रोक लगाने की मांग

यह याचिका एनजीओ ADR और मध्य प्रदेश से कांग्रेस नेता जया ठाकुर सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. याचिका में नए कानून पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है. जया ठाकुर का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियां नए कानून के तहत तब भी की जा रही है, जब याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. दायर याचिका में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति से हटाना अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ और अन्य के मामले का उल्लंघन है.

अनूप बरनवाल ने कहा कि इस मामले में फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा था कि पैनल में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होनें चाहिए. वहीं नए कानून में सीजेआई (CJI) की जगह कैबिनेट मंत्री को बतौर सदस्य रखा गया है.

विपक्ष नेता और सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश में होंगें शामिल

याचिका में यह भी कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. 2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति तीन सदस्यीय पैनल की तरफ से की जाएगी. इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगें. केंद्र सरकार ने 2023 में जो कानून बनाया हैं उसमें सिलेक्शन कमिटी में चीफ जस्टिस को हराकर उनकी जगह पीएम की ओर से नामित केंद्रीय मंत्री को रखा गया.

इस तरह से सिलेक्शन प्रक्रिया खतरे में होगी. वहीं हेरफेर का आदेश है. क्योंकि सिलेक्शन की प्रक्रिया एग्जेक्युटिव के कंट्रोल में होगा. इससे पहले याचिकाकर्ता जया ठाकुर की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा था कि जब कोई फैसला सुनाया जाता हैं तो कोई उल्लंघन नहीं हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 में स्पष्ट उल्लंघन हुआ है.


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-भारत एक्सप्रेस 



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