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Nitish Katara Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई में देरी पर दिल्ली सरकार को अवमानना नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नीतीश कटारा हत्या मामले में दोषी सुखदेव पहलवान द्वारा रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट के आदेश का पालन नही करने पर कोर्ट ने दिल्ली के गृह विभाग के प्रिंसीपल सेक्रेटरी को अवमानना नोटिस जारी किया है.

Supreme Court
Edited by Akansha

 Nitish Katara Murder Case: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नीतीश कटारा हत्या मामले में दोषी सुखदेव पहलवान द्वारा रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट के आदेश का पालन नही करने पर कोर्ट ने दिल्ली के गृह विभाग के प्रिंसीपल सेक्रेटरी को अवमानना नोटिस जारी किया है. जस्टिस अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार नियमित रूप से ऐसे मामलों में देरी करती हैं. कोर्ट ने कहा कि सरकार ने खुद कहा था कि दो सप्ताह में विचार किया जाएगा, लेकिन विचार नहीं किया.

Nitish Katara Murder Case:  कोर्ट ने 28 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह मामला व्यक्ति के स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है. कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह मामला मुख्यमंत्री के पास जाएगा, फिर राज्यपाल के पास. कृपया हमें बताएं कि इस विभाग का प्रभारी कौन है. हम अवमानना नोटिस जारी करेंगे. वही दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि आज इस मामले पर मीटिंग होनी है इसलिए सुनवाई को टाल दिया जाए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 2 सप्ताह में फैसला लेने को कहा था. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि सुखदेव पहलवान की 20 साल की सजा 10 मार्च को पूरी हो रही है, तो वह जेल में कैसे रहेगा.

Nitish Katara Murder Case:  वही सुखदेव पहलवान की ओर से पेश वकील ने कहा कि 20 साल की सजा पूरी हो गई है, लिहाजा उसे जेल से छोड़ा जाए. आपको बता दें कि 3 अक्टूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव और विशाल यादव की सजा घटाकर 24 साल कर दी थी, जबकि सुखदेव पहलवान की सजा घटाकर 20 साल कर दी थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने विकास यादव और विशाल यादव को 25 साल और 5 साल की दो सजा यानी 30 साल कैद की सजा दी थी. जबकि सुखदेव पहलवान को 20 साल और 5 साल की यानी 25 साल की कैद की सजा दी थी. विशाल यादव यूपी के बाहुबली नेता डीपी यादव का भतीजा है. दोनों की नीतीश कटारा की हत्या के दोषी है. 17 फरवरी 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास यादव और विशाल यादव को मौत की सजा देने से इंकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये मामला केवल हत्या का है न कि जघन्यतम अपराध का. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस मामले में आजीवन जेल में रखने की भी सजा नही दी जा सकती.

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भारत एक्सप्रेस



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