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सुप्रीम कोर्ट से ऑरोविले टाउनशिप परियोजना को बड़ी राहत, एनजीटी का आदेश किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने ऑरोविले टाउनशिप परियोजना को बड़ी राहत दी. एनजीटी के आदेश को रद्द कर दिया, जिससे अब विकास कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी.

Delhi High Court

सांकेतिक तस्वीर.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

पुडुचेरी में ऑरोविले टाउनशिप परियोजना से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां ऑरोविले फाउंडेशन को बड़ी राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें फाउंडेशन को पुडुचेरी में अपनी टाउनशिप में विकास कार्य करने से रोक दिया गया था.

एनजीटी का आदेश क्यों हुआ रद्द?

जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने एनजीटी के 28 अप्रैल 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली ऑरोविले फाउंडेशन की अपील के पक्ष में फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि विकास का अधिकार और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार दोनों ही मौलिक अधिकार हैं. संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत विकास का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि पर्यावरण संरक्षण.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एहतियाती सिद्धांत (Precautionary Principle) और “प्रदूषण फैलाने वाले को भुगतान करना होगा” (Polluter Pays Principle) देश के पर्यावरण कानून का हिस्सा हैं. लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि विकास कार्यों को पूरी तरह से रोकना सही नहीं है, और विकास का अधिकार भी प्राथमिकता रखता है.

याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी थी?

पर्यावरण कार्यकर्ता नवरोज केरसप मोदी ने एनजीटी में याचिका दायर कर ऑरोविले टाउनशिप परियोजना पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि फाउंडेशन ने बड़ी संख्या में पेड़ काटे हैं और जिस जमीन पर परियोजना बनाई जा रही है, वह वन क्षेत्र है. एनजीटी ने इसी आधार पर फाउंडेशन के विकास कार्यों पर रोक लगा दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि ऑरोविले फाउंडेशन ने किसी भी पर्यावरण कानून का उल्लंघन नहीं किया है. कोर्ट ने माना कि एनजीटी ने आदेश जारी करने में गलती की थी.

फाउंडेशन ने अपनी दलील में कहा कि ऑरोविले एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक टाउनशिप है, न कि वन क्षेत्र. फाउंडेशन के अनुसार, परियोजना को पर्यावरणीय नियमों के तहत ही विकसित किया गया है.

क्या है ऑरोविले टाउनशिप?

ऑरोविले पुडुचेरी में स्थित एक अद्वितीय और खूबसूरत जगह है. इसकी स्थापना 1968 में श्री अरबिंदो की आध्यात्मिक सहयोगी मीरा अल्फासा ने की थी, जिन्हें लोग “मां” के नाम से भी जानते हैं. यह टाउनशिप शांति, एकता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है और यहां दुनियाभर से लोग आते हैं.


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-भारत एक्सप्रेस



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