भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने मंगलवार को न्यायिक अनुचितता के आरोपों पर विचार करते समय ईमानदारी, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया. यूके सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी आर गवई ने यूके सुप्रीम कोर्ट राउंडटेबल में “न्यायिक वैधता और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखना” शीर्षक के साथ भाषण दिया.
न्यायिक अनैतिकता के मुद्दे पर बोलते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि इस विश्वास को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को संबोधित करने और हल करने के लिए की गई त्वरित, निर्णायक और पारदर्शी कार्रवाई में निहित है.
सीजेआई ने कहा कि हर सिस्टम, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न हो, पेशेवर अनैतिकता के मुद्दों के लिए अतिसंवेदनशील होती है. दुख की बात है कि न्यायपालिका के भीतर भी भ्रष्टाचार और अनैतिकता के मामले सामने आए हैं. ऐसी घटनाओं का अनिवार्य रूप से जनता के विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पूरे सिस्टम की अखंडता में विश्वास कम हो सकता है.
न्यायाधीश, सार्वजनिक पदाधिकारी के रूप में जवाबदेह हैं
जस्टिस गवई ने कहा कि जब भी भारत में ऐसे मामले सामने आए हैं, तो सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार अनैतिकता को संबोधित करने के लिए तत्काल और उचित उपाय किए हैं. सीजेआई गवई ने इस मंच का उपयोग जनता का विश्वास बनाने के लिए भारतीय न्यायपालिका द्वारा उठाए गए कई सक्रिय कदमों को उजागर करने के लिए भी किया.
पारदर्शिता पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने स्वेच्छा से अपनी संपत्ति का खुलासा करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा, “न्यायाधीश, सार्वजनिक पदाधिकारी के रूप में, लोगों के प्रति जवाबदेह हैं.”
उन्होंने संविधान पीठ की सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग और ई-एससीआर पोर्टल का उल्लेख करते हुए पहुंच और सार्वजनिक संचार के महत्व पर जोर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों तक मुफ्त पहुंच प्रदान करता है. उन्होंने कहा, “यह पहल कानून के छात्रों, शोधकर्ताओं और नागरिकों को अदालत के फैसलों तक एक-क्लिक पहुंच सक्षम करके बहुत लाभान्वित करती है.”
सीजेआई गवई के अलावा भारतीय सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इंग्लैंड और वेल्स की महिला मुख्य न्यायाधीश बैरोनेस कैर और लॉर्ड लेगट ने मंगलवार को यूके सुप्रीम कोर्ट में आयोजित गोलमेज चर्चा में भाग लिया.
-भारत एक्सप्रेस
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