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“एक व्यक्ति की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था आपातकाल”, आपातकाल को लेकर अमित शाह ने ये क्या कह दिया

Amit Shah On Emergency: अमित शाह ने आपातकाल पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जनता ने जब शंखनाद किया तो कांग्रेस की तानाशाही सरकार उखड़ गई. उन्होंने कहा कि आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं था, यह कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था.

amit shah on emergency

गृह मंत्री अमित शाह. (फाइल फोटो)

Amit Shah On Emergency: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल कांग्रेस की सत्ता की भूख का अन्यायकाल था.

अपने एक्स अकाउंट पर अमित शाह ने आपातकाल पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जनता ने जब शंखनाद किया तो कांग्रेस की तानाशाही सरकार उखड़ गई. उन्होंने आपातकाल को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं था, यह कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था.

कांग्रेस की सत्ता की भूख का अन्यायकाल था आपातकाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर देशवासियों को यातनाएं दी. इस दौरान प्रेस की स्वतंत्रता कुचली गई और न्यायपालिका के हाथ बांध दिए गए. यह कांग्रेस की सत्ता की भूख का अन्यायकाल था.

एक व्यक्ति की लोकतंत्रविरोधी मानसिकता का परिचायक था आपातकाल

गृह मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल के नाम पर देश के साथ जो अन्याय किया. देशवासियों को जो पीड़ा और यातनाएं दी. उसे नई पीढ़ी जान सके. इसी उद्वेश्य से मोदी सरकार ने इस दिन को संविधान हत्या दिवस नाम दिया. अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि “आपातकाल कोई राष्ट्रीय आवश्यकता नहीं, बल्कि कांग्रेस और एक व्यक्ति की लोकतंत्रविरोधी मानसिकता का परिचायक था.”

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सामाजिक कार्यकर्ताओं तक को जेल में डाला गया

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आपातकाल लगाकर कांग्रेस की तानाशाही सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला. उन्होंने कहा कि आपातकाल कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का परिचायक था. जिसे जनता ने उखाड़ फेंका था.

बीजेपी ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाएगी आपातकाल

बता दें कि, साल 2024 में अमित शाह ने घोषणा की थी कि मोदी सरकार 25 जून (आपातकाल लगाने का दिन) को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनायेगी. ताकि इस दौरान जिन लोगों ने कांग्रेस की यातनाएं सही और अपना बलिदान दिया, उन्हें याद किया जा सके. उन्होंने कहा था कि संविधान हत्या दिवस मनाने से हर भारतीय के मन में स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा की ज्वाला को प्रज्वलित करने में मदद मिलेगी. जिससे भविष्य में कांग्रेस जैसी तानाशाही ताकतों को इस तरह के भयानक निर्णय लेने से रोका जा सके.

– भारत एक्सप्रेस



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