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केरल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में राज्यपाल की देरी के खिलाफ दायर याचिका को केरल सरकार ने लिया वापस

केरल विधानसभा से पारित विधेयकों को मंजूरी देने में राज्यपाल की देरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को केरल सरकार ने वापस ले लिया है. कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.

Supreme Court
Edited by Radha Priya

Supreme Court: केरल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में राज्यपाल की देरी के खिलाफ दायर याचिका को केरल सरकार ने वापस ले लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से पेश पूर्व अटॉर्नी जनरल के. के वेणुगोपाल ने याचिका को वापस लेने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी. जिसपर जस्टिस पीएस नरसिम्हा के अध्यक्षता वाली बेंच ने सहमति व्यक्त की है.

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में संविधान पीठ के पास सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए. इसपर वेणुगोपाल ने कहा कि नही मैं याचिका को वापस लेना चाहता हूं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुच्छेद 32 और उससे जुड़ी विशेष अनुमति याचिका के तहत याचिका वापस लेने का केरल सरकार ने अनुरोध किया, जिसकी अनुमति दी जा रही है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 2023 में केरल राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के दो साल तक बैठे रहने पर नाराजगी व्यक्त की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस बारे में दिशा निर्देश निर्धारित करने पर विचार करेगी कि राज्यपाल कब विधेयकों को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज सकते है. कोर्ट ने कहा था कि यह संविधान के प्रति हमारी जवाबदेही के बारे में है और लोग हमसे इसके बारे में पूछते हैं.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को समय सीमा के अंदर मंजूरी देने या अस्वीकार करने के लिए राज्य के राज्यपालों के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग वाली अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी थी.

अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा

वही राज्यपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच संचार का कोई न कोई माध्यम खुला होना चाहिए.

हम विवादों को सुलझा लेंगे. सरकार का कामकाज चलना चाहिए. दरअसल केरल सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्यपाल का मौजूदा आचरण कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था सहित हमारे संविधान के मूल सिंद्धान्तों के खिलाफ है. इन विधेयकों के माध्यम से जनता के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया जाना चाहिए.लेकिन राज्यपाल इन्हें रोक कर बैठे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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