प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी की सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री और सांसद रहे मोहम्मद आज़म खान को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने सोमवार को उनके और अन्य आरोपियों की याचिकाओं में संशोधन की अनुमति दे दी. 2016 में हुई कथित जबरन बेदखली की घटना से जुड़ी याचिका में पहले ट्रायल की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी. लेकिन अब याचिकाकर्ताओं ने यह मांग वापस ले ली है. कोर्ट ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है.
अब सिर्फ दोबारा गवाही और वीडियोग्राफी की मांग
संशोधित याचिका में अब केवल यह आग्रह किया गया है कि मुख्य गवाहों, खासतौर से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ज़फर अहमद फारूकी की गवाही दोबारा कराई जाए. इसके अलावा एक वीडियोग्राफी को भी सबूत के तौर पर रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह वीडियो यह साबित करता है कि वे घटना के समय वहां मौजूद नहीं थे.
ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 30 मई 2025 को पारित उस आदेश पर अंतरिम रोक भी बढ़ा दी है, जिसमें गवाहों को दोबारा बुलाने और वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड में शामिल करने की याचिकाकर्ताओं की मांग खारिज कर दी गई थी. यह रोक अब अगली सुनवाई की तारीख 28 अगस्त 2025 तक लागू रहेगी.
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12 एफआईआर पर आधारित है मुकदमा
यह मामला रामपुर के कोतवाली थाने में 2019 में दर्ज 12 एफआईआर पर आधारित है. इन एफआईआर (संख्या 528/2019 से 539/2019 और 556/2019) में डकैती, गैरकानूनी प्रवेश और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप हैं. इन सभी मामलों को 8 अगस्त 2024 को एमपी/एमएलए कोर्ट, रामपुर में एक साथ जोड़ा गया था. इस पूरे मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ द्वारा की गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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