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गलवान झड़प के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर पीएम मोदी, ये SCO समिट क्यों है इतना खास? पढ़ें EXPLAINER

PM Modi China Visit SCO: गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते काफी खराब हो गए थे. इसका असर ना सिर्फ ट्रेड पर पड़ा बल्कि धार्मिक यात्राएं भी रोक दी गईं. पीएम मोदी की इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव को कम करना भी है.

PM Modi China Visit SCO

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय जापान यात्रा के बाद चीन पहुंच गए हैं. वहां वो आज चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की मीटिंग में भाग लेंगे. पीएम मोदी का ये दौरा इसलिए भी बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि वो गलवान झड़प के बाद पहली बार चीन पहुंचे हैं. इससे पहले वो 2018 में चीन की यात्रा पर गए थे.

गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते काफी खराब हो गए थे. इसका असर ना सिर्फ ट्रेड पर पड़ा बल्कि धार्मिक यात्राएं भी रोक दी गईं. पीएम मोदी की इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव को कम करना भी है.

इतिहास की सबसे बड़ी SCO समिट का आयोजन

चीन के तियानजिन शहर में इतिहास की सबसे बड़ी SCO समिट का आयोजन हो रहा है. जिसमें भाग लेने के लिए ना सिर्फ इसके मुख्य मेंबर शामिल हो रहे हैं. बल्कि दुनिया भर के करीब 20 देश भी इस समिट का गवाह होंगे. इस समिट में विश्व पटल के दो नेता पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन स्पॉटलाइट में रहेंगे. मोदी और पुतिन के साथ-साथ इसमें एशिया के लगभग सभी मजबूत और ताकतवर देश शामिल होंगे.

प्रधानमंत्री इस समिट के बाद चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से भी मुलाकत कर सकते हैं, जबकि सोमवार को पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात पहले से ही तय है.

क्यों खास है इस बार का SCO समिट?

7 सालों बाद पीएम मोदी का चीन दौरा

2020 में गलवान में चीन और भारत के बीच झड़प के बाद यह पीएम मोदी का पहला चीन दौरा है. जिसकी वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समिट पर है. इस दौरे पर पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं.

ट्रंप का हाई टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में दुनिया के लगभग सभी देशों पर हाई टैरिफ लगा रखा है. जिसमें भारत पर 50%, चीन पर 30% भी शामिल है. जिसको लेकर यह मीटिंग और भी खास हो गया है. SCO मीटिंग में शामिल देश अमेरिकी दबाव के खिलाफ एक मंच पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि इसका कितना प्रभाव पड़ता है, ये तो मीटिंग के बाद पता चलेगा.

चीन का अमेरिका को चुनौती

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के सहारे चीनी राष्ट्रपति अमेरिका को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं. वो चीन को अमेरिकी नेतृत्व के ग्लोबल ऑर्डर के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. चीन पश्चिम को दिखाना चाहता है कि वो रूस और भारत जैसे देशों के साथ मिलकर भी ताकतवर गुट बना सकता है.

भारत और चीन के संबंध हुए बेहतर

इस समिट में सिर्फ SCO सदस्य ही नहीं बल्कि ऑब्जर्वर और पार्टनर देश भी शामिल हो रहे हैं. इसमें पाकिस्तान भी शामिल होगा. भारत की कोशिश रहेगी कि आतंकवाद जैसे मुद्दे पर वो समर्थन जुटाये. बता दें कि, SCO रक्षा मंत्री की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जॉइंट स्टेटमेंट पर इसलिए दस्तखत करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि इसमें पहलगाम हमले का कोई जिक्र नहीं था.

वहीं गलवान के बाद भारत और चीन के रिश्ते सुधरे हैं. सीमा पर नरमी दिख रही है. सीधी उड़ानें शुरू हो गई हैं. जिसका असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पड़ा. चीन ने गलवान के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को बंद कर दिया था. जिसे इस साल पहली बार खोला गया.

अभी भी हैं विवाद

पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले ही भारत और चीन के रिश्तों में नरमी दिखने लगी थी. कुछ दिनों पहले ही चीनी विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आए थे. जिसका परिणाम हुआ कि सीमा और व्यापार जैसे अहम मसले पर चीन और भारत के बीच सहमति बन पाई है.
हालांकि सीमा विवाद और डैम के मसले पर टेंशन बरकरार है. आर्थिक दबाव और वैश्विक हालात की वजह से दोनों देशों के तार एक बार फिर जुड़ रहे हैं.

किन-किन मुद्दों पर बनी सहमति

भारत और चीन के बीच आम मसलों पर सहमति बनी है. जिसका परिणाम कई मुद्दों पर देखने को मिला. अक्टूबर 2024 में भारत-चीन के बीच समझौते के बाद गलवान और देपसांग जैसे इलाकों से दोनों देशों ने सैनिक पीछे हटाये.

एक बार फिर भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानें शुरू हो गई हैं. वहीं बिजनेस की बात करें तो चीन ने भारत को रेयर अर्थ मिनिरल्स देने और खाद मशीनरी सप्लाई करने का भरोसा भी दिया है.

वहीं रिश्तों की कड़वाहट कम होने का असर धार्मिक यात्राओं पर भी देखने को मिला. चीन ने भारतीय श्रद्धालुओं को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने की अनुमति दे दी. वहीं पत्रकारों और पर्यटकों के लिए वीजा के नियम आसान कर दिये हैं.

ये भी पढ़ें- PM Modi In China: पीएम मोदी की चीन यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में कैसे हो सकता है सुधार?

किन मुद्दों पर विवाद बरकरार

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का अभी भी निर्धारण नहीं हो पाया है. चीन के द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल डैम बनाया जा रहा है. जिसका भारत विरोध कर रहा है. चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है. वहीं गलवान के बाद भारत ने कई चीनी कंपनियों को भारत में ऑपरेट होने पर रोक लगा दी थी.

– भारत एक्सप्रेस



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