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Pakistan News: बूटों के नीचे रौंदी जा रही बलूचों की आवाज, महरंग बलूच की हिरासत पर बढ़ा विवाद, मानवाधिकार संस्था ने क्या कहा?

Pakistan News: मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने अपने प्रमुख महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की 15 दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने की कड़ी निंदा की है.

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Pakistan News: मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने अपने प्रमुख महरंग बलूच और अन्य कार्यकर्ताओं की 15 दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने की कड़ी निंदा की है. बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र से इस स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है.

बीवाईसी की यह प्रतिक्रिया स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संस्था के वकील के हवाले से बताया कि क्वेटा की आतंकवादरोधी अदालत द्वारा पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी विभाग की बीवाईसी प्रमुख महरंग बलूच और अन्य की हिरासत बढ़ाने के अनुरोध को खारिज करने के बाद सामने आई है.

न्यायिक हिरासत में भेजने के दिये निर्देश

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, जज मुहम्मद अली मुबीन ने महरंग बलूच की हिरासत बढ़ाने से इनकार करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया.

बलूच कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा गिरफ्तार

मानवाधिकार संस्था का कहना है कि पिछले छह महीनों से मनमाने और गैरकानूनी तरीके से स्वतंत्रता से वंचित किए जाने और बार-बार पुलिस रिमांड पर रखे जाने के बाद बीवाईसी प्रमुख महरंग बलूच, केंद्रीय नेताओं-बेबागर बलूच और सिबगतुल्लाह शाह और कार्यकर्ता बीबो बलूच और गुलजादी बलूच को न्यायिक हिरासत पर क्वेटा की हुदा जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.

3 महीने से ज्यादा दिनों तक जेल में रखा

बीवाईसी का कहना है कि तीन महीने से ज्यादा समय तक, उन्हें बिना किसी उचित प्रक्रिया या प्रभावी न्यायिक समीक्षा के जेल में रखा गया. मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित आरोपों के आधार पर उन्हें बाद में फिर से गिरफ्तार किया गया और बिना किसी वैध कानूनी औचित्य के दो महीने से ज्यादा समय तक पुलिस हिरासत में रखा गया. हालांकि अब उनकी पुलिस रिमांड समाप्त हो गई है फिर भी वे क्वेटा की हुदा जेल में न्यायिक रिमांड पर हैं.

बीवाईसी के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संघ बनाने और शांतिपूर्ण सभा करने के अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए निशाना बनाया गया है. उन्होंने बलूचिस्तान में गुमशुदगी, हत्याओं और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई है.

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अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

मानवाधिकार संस्था ने इस बात पर जोर दिया कि असहमति को दबाने के लिए मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और लंबे समय तक सुनवाई-पूर्व हिरासत का इस्तेमाल, मानवाधिकार रक्षकों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत पाकिस्तान के दायित्वों का सीधा उल्लंघन है.

बीवाईसी ने संयुक्त राष्ट्र से इस स्थिति पर तत्काल ध्यान देने और पाकिस्तान पर अपने अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों, जिनमें मौलिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा और प्रभावी उपचार का अधिकार शामिल है, का पालन करने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया.

– भारत एक्सप्रेस



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