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हम तो डूबे सनम…क्या RJD के लिए भस्मासुर साबित हुए तेज प्रताप?

Tej Pratap effect On RJD: राजद के इस हाल का कारण तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव में ‘इन हाउस पॉलिटिकल वॉर’ है. जिसने मतदाताओं और राजद समर्थकों को गुमराह कर दिया. जिसकी वजह से राजद के वोट बंट गए. जिसका परिणाम है कि आज राजद इतिहास की सबसे बड़ी हार की कगार पर खड़ा है.

Tej Pratap effect On RJD

Tej Pratap effect On RJD: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 महागठबंधन के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हो रहा है. इस चुनाव में आरजेडी को इतिहास की सबसे करारी हार मिलने जा रही है. इस बार बीजेपी ने राजद को ना सिर्फ चारों खाने चित्त कर दिया, बल्कि हालत ऐसी है कि 15 राउंड की काउंटिंग होने के बाद भी तेजस्वी यादव पीछे चल रहे हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटें जीतने वाले आरजेडी का इस विधानसभा चुनाव में अबतक के सबसे खराब प्रदर्शन के कारण पर चुनावी गणितज्ञ अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं. कोई जनसुराज को महागठबंधन की हार का कारण बता रहा तो कोई कांग्रेस को. इसमें से एक नाम जिसपर लगभग सभी चुनावी चाणक्य सहमत हैं वो हैं तेज प्रताप यादव.

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजद के इस हाल का कारण तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव में ‘इन हाउस पॉलिटिकल वॉर’ है. जिसने मतदाताओं और राजद समर्थकों को गुमराह कर दिया. जिसकी वजह से राजद के वोट बंट गए. जिसका परिणाम है कि आज राजद इतिहास की सबसे बड़ी हार की कगार पर खड़ा है. अबतक के रुझानों के हिसाब से राजद को सिर्फ 22.69 प्रतिशत वोट मिले हैं.

तेजस्वी को सर्वेसर्वा बनाना जनता को नामंजूर

पारिवारिक कारणों के चलते लालू प्रसाद यादव ने तेज प्रताप को ना सिर्फ 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, बल्कि उन्हें परिवार से भी निकाल दिया था. जिसके बाद तेज प्रताप यादव ने खुद की पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाकर अपने विधानसभा क्षेत्र महुआ से चुनावी रण में उतरे. इसके अलावा उन्होंने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिये. जिसकी वजह से विधानसभा चुनाव 2025 में राजद के वोटों का बंटवारा हो गया और तेजस्वी यादव को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बाहर निकालने को लेकर लालू प्रसाद यादव ने नैतिकता की दुहाई दी थी, लेकिन तेजस्वी यादव मामले में लालू यादव ने ऐसा नहीं किया था. 2017 में जब भ्रष्टाचार के मामले को लेकर नीतीश कुमार तेजस्वी यादव से डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देने के लिए कह रहे थे, तब लालू प्रसाद यादव ने उनका बचाव किया था. जिसके बाद नीतीश कुमार इस्तीफा दे दिये थे.

लालू यादव ने जिस तेज प्रताप यादव मामले में नैतिकता की दुहाई दी थी, वहीं तेजस्वी यादव मामले में उन्होंने उसे स्वीकार किया था. जो कि बिहार की जनता को नामंजूर था.

क्या भस्मासुर साबित हुए तेज प्रताप?

पार्टी और घर से निकाले जाने के बाद तेजप्रताप यादव को लेकर लालू फैमिली में सहानुभूति बनी रही. लोग मानने को तैयार ही नहीं थे कि तेज प्रताप यादव को घर से निकाला जा सकता था. राजद के कई नेता किसी ना किसी बहाने तेज प्रताप यादव से मिलते रहे. इससे जनता में तेज प्रताप यादव को लेकर एक सेंटीमेंट बना रहा. लालू भले ही खामोश रहे, लेकिन राबड़ी देवी ने अपने बेटे को जीत का आशीर्वाद तक दिया. इससे जनता में तेज प्रताप को लेकर जबरदस्त सहानुभूति दिखती रही. हालांकि जनता ने तेज प्रताप को महुआ में वो समर्थन नहीं दिया, जिसकी वो उम्मीद कर रहे थे, लेकिन राघोपुर की जनता ने तेजस्वी से इसका हिसाब ले लिया. इस समय तेजस्वी राघोपुर से 8000 वोटों से पीछे चल रहे हैं.

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बाढ़ के समय कर दिये खेल

बिहार में बाढ़ ने जब तबाही मचा रखी थी, तब राघोपुर में भी जनता हलकान थी. जनता तेजस्वी यादव से मदद की उम्मीद रखी थी, लेकिन मदद को तेज प्रताप आए. लोगों ने तेज प्रताप से तेजस्वी की शिकायत भी की. तेज प्रताप के इस रूप को देख जनता में उनके प्रति जबरदस्त सहानुभूति उठी. उसका खामियाजा तेजस्वी को इस चुनाव में उठाना पड़ा.

बिहार की राजनीति में आज जो कुछ भी हुआ वह कई सवाल खड़े कर रहा है. यह तेजस्वी यादव की राजनीतिक चूक की ओर इशारा कर रहा है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ घर के झगड़े के चलते हुआ या इसके लिए कोई और भी जिम्मेदार है.

-भारत एक्सप्रेस



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