सुप्रीम कोर्ट से ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विवादित पोस्ट करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद अमीर अजमद अली खान महमूदाबाद को झटका लगा हैं. कोर्ट महमूदाबाद को विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली हुई हैं.
निचली अदालत दायर चार्जशीट पर न ले संज्ञान
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान महमूदाबाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने कोर्ट को बताया कि पासपोर्ट रिलीज करने के लिए एक आवेदन दिया गया हैं. जिसपर जस्टिस सूर्यकांत ने मुस्कराते हुए कहा कि यह यात्रा करने का सही समय नहीं है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभी इस केस में निचली अदालत दायर चार्जशीट पर संज्ञान न ले, आरोप तय न किए जाए.
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा पुलिस की ओर से बताया गया है अली खान के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थी. एक केस में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है, दूसरे केस में चार्जशीट दाखिल की गई है. अली की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि धारा 152 की संवैधानिकता से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उसके बावजूद इसका इस्तेमाल हो रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रोफेसर की नहीं, डिक्शनरी की जरूरत: कोर्ट
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अली की गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था. साथ ही कोर्ट ने एसआईटी को फटकार लगाते हुए जांच को दो एफआईआर तक ही सीमित रखने का आदेश दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपको प्रोफेसर की जरूरत नहीं है, आपको डिक्शनरी की जरूरत है.
कोर्ट ने कहा था कि एसआईटी को अब महमूदाबाद को दोबारा पूछताछ के लिए तलब करने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने एसआईटी को याद दिलाया था कि उसे सिर्फ पोस्ट की भाषा और अभिव्यक्ति में अपराध के पहलुओं की जांच करनी है, न कि व्यापक जांच करनी. एक निजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता की शिकायत पर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था. अली के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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