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नई परंपरा की शुरुआत! जस्टिस बीआर गवई ने पेश की की मिसाल; CJI सूर्यकांत के लिए तत्काल छोड़ा सरकारी कार

निवर्तमान CJI जस्टिस बीआर गवई ने भी एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की. जस्टिस गवई ने नए CJI के लिए कार राष्ट्रपति भवन में छोड़ दी और खुद वहां से दूसरी कार में रवाना हुए.

Justice BR Gavai Sets an Example by Leaving Official Car for CJI Justice Surya Kant

सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के तौर पर शपथ ली और इसके साथ ही न्यायपालिका में एक नई परंपरा की शुरुआत हुई. जस्टिस सूर्यकांत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई, जिसकी खास बात यह रही कि उन्होंने हिंदी में शपथ ली. इसके साथ ही इस कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि र्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने गजब की मिसाल पेश की है.

बता दें जस्टिस सूर्यकांत निवर्तमान सीजेआई जस्टिस बीआर गवई का स्थान ले रहे हैं. अब लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे. बीआर गवई रविवार को सेवानिवृत्त हुए थे. जस्टिस सूर्यकांत के नाम का ऐलान पहले ही हो गया था.

नए CJI के लिए जस्टिस बीआर गवई ने छोड़ी कार

भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई भी शरीक हुए. उन्होंने एक ऐसी मिसाल पेश की जिसकी खूब सराहना हो रही है. जस्टिस गवई सीजेआई के लिए निर्धारित आधिकारिक सरकारी कार से राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे. समारोह संपन्न होने के बाद उन्होंने इस कार का इस्तेमाल वापस जाने के लिए नहीं किया. इसके बजाय, उन्होंने यह आधिकारिक कार राष्ट्रपति भवन परिसर में ही छोड़ दी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए तुरंत सरकारी वाहन उपलब्ध रहे.

जस्टिस गवई इसके बाद राष्ट्रपति भवन से जाने के लिए दूसरी कार में सवार होकर वापस रवाना हुए. उनके इस सांकेतिक कदम को न्यायपालिका में जनता के भरोसे को मजबूत करने और पद से मोह न रखने की एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

‘पूर्ण संतुष्टि के साथ संस्थान छोड़ रहे हैं’

जस्टिस बीआर गवई भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित जज थे और वह साढ़े छह महीने तक इस पद पर रहे. सेवानिवृत्ति के मौके पर उन्होंने संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक वकील और न्यायाधीश के रूप में चार दशकों की यात्रा पूरी करने के बाद पूर्ण संतुष्टि की भावना के साथ संस्थान छोड़ रहे हैं. अपने अंतिम कार्य दिवसों में, जस्टिस गवई की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने राज्यपालों और राष्ट्रपति द्वारा विधेयकों की मंजूरी के लिए समयसीमा की व्यवस्था को समाप्त करने पर अपनी सर्वसम्मति वाली राय दी थी.

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जस्टिस सूर्यकांत का परिचय

जस्टिस सूर्यकांत 30 अक्टूबर को अगले प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे और वह 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक इस पद पर रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट आने से पहले वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे. उन्होंने 1981 में हिसार के गवर्न्मेंट पोस्ट ग्रेजुएक कॉलेज से स्नातक और 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली थी. शीर्ष अदालत में अपने अब तक के कार्यकाल में जस्टिस सूर्यकांत कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें अनुच्छेद 370, एसआईआर (SIR) और पेगासस केस शामिल हैं.



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