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मुस्लिम महिला को दहेज में दिया गया पैसा और सोना ससुराल से वापस पाने का हक: सुप्रीम कोर्ट

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के हक में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिला को दहेज में दिया गया पैसा और सोना ससुराल से वापस पाने का हकदार है.

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं (Muslim woman) के हक में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिला को दहेज में दिया गया पैसा और सोना ससुराल से वापस पाने का हकदार है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला दिया है.

कैश, सोना वापस पाने का अधिकार

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला को उसकी शादी के समय अपने माता-पिता द्वारा अपने या अपने पति को दिए गए कैश, सोना और दूसरी चीजें कानूनी तौर पर वापस पाने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है.

बयानों में असमानता

यह मामला पश्चिम बंगाल की रौशनारा बेगम से जुड़ा है. जिनकी शादी अगस्त 2005 में हुई थी. कुछ समय बाद ही संबंध बिगड़ गए और मई 2009 में वह ससुराल छोड़कर मायके चली गई. दिसंबर 2011 में तलाक हो गया. तलाक के बाद उन्होंने 1986 के कानून की धारा 3 के तहत दावा दायर कर 17 लाख 67 हजार 980 रुपए और 30 भोरी सोने के गहनों की वापसी मांगी.

हाई कोर्ट ने काजी और पिता के बयानों में असमानता बताकर दावा खारिज कर दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी रजिस्टर रखने वाले काजी की गवाही और मूल दस्तावेज को संदेह के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता.

पति को सब वापस करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की व्याख्या महिला (woman) की गरिमा और समानता के संवैधानिक अधिकारों के आधार पर करने पर जोर दिया. कोर्ट ने पति को सात लाख रुपए और तीस भोरी सोने का मूल्य सीघे महिला के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालय सिर्फ कानून लागू करने वाली संस्थाए नहीं, बल्कि समाज में लैंगिक न्याय और उन्नति सुनिश्चित करने वाली संवैधानिक संस्थाए भी हैं. इसलिए सामाजिकयथार्थों से अलग होकर कानून की व्याख्या नहीं कि जा सकती.

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-भारत एक्सप्रेस



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