PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश की सांस्कृतिक पहचान को लेकर अपनी बात रखी है. 28 दिसंबर 2025 को प्रसारित मन की बात के 129वें एपिसोड में उन्होंने दुबई में चल रही कन्नड़ पाठशाला का खास तौर पर जिक्र किया.
पीएम मोदी ने बताया कि कैसे भारतीय भाषाएं आज भी देश की सीमाओं से बाहर जाकर जिंदा हैं, और इसके पीछे वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की मेहनत और अपनी संस्कृति से जुड़ाव है.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दुबई की कन्नड़ पाठशाला की सराहना की. यह एक वीकेंड स्कूल है, जहां भारतीय प्रवासी परिवारों के एक हजार से ज्यादा बच्चे कन्नड़ भाषा पढ़ना, लिखना और बोलना सीख रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि तेज़ी से बदलती दुनिया और डिजिटल लाइफस्टाइल के बावजूद लोग अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं होती, बल्कि उसमें हमारी परंपराएं, इतिहास और संस्कार बसते हैं.
पीएम मोदी ने व्यक्त की चिंता
प्रधानमंत्री ने बताया कि दुबई में रहने वाले कन्नड़ भाषी परिवारों ने देखा कि विदेश में पले-बढ़े बच्चों में धीरे-धीरे मातृभाषा का इस्तेमाल कम हो रहा है. इसी चिंता को देखते हुए इन परिवारों ने बिना किसी सरकारी मदद का इंतजार किए, खुद एक मुफ्त और स्वयंसेवकों द्वारा चलाई जाने वाली पाठशाला शुरू की.
Highlighted a commendable effort in Dubai that seeks to make the beautiful Kannada language popular among the Indian diaspora.#MannKiBaat pic.twitter.com/QXujjwPW2J
— Narendra Modi (@narendramodi) December 28, 2025
आज यह पाठशाला हर वीकेंड बड़ी संख्या में बच्चों को अपनी ओर खींच रही है. पीएम मोदी ने इसे समाज के नेतृत्व और भारत की सभ्यतागत सोच का बेहतरीन उदाहरण बताया.
2023 में शुरू हुई इस कन्नड़ पाठशाला में अब न सिर्फ बच्चों की संख्या बढ़ी है, बल्कि पढ़ाई का स्तर भी बेहतर हुआ है. यहां कहानी, संस्कृति और साहित्य के जरिए बच्चों को मज़ेदार तरीके से भाषा सिखाई जाती है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी पहलें बच्चों का भारत से भावनात्मक रिश्ता मजबूत करती हैं और उन्हें अपनी पहचान पर गर्व करने वाला आत्मविश्वासी वैश्विक नागरिक बनाती हैं.
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सीमा पार भाषा और पहचान
पीएम मोदी ने इस पहल को भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि जब भारतीय समुदाय विदेशों में अपनी भाषा और संस्कृति को संभालकर रखते हैं, तो इससे दुनिया में भारत की छवि और सम्मान बढ़ता है.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय दुनिया के सामने भारत की विविधता और एकता को दिखाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
पीएम मोदी की इस बात पर सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रिया देखने को मिली. कई लोगों ने कन्नड़ भाषा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने पर खुशी जताई. लोगों को यह भी पसंद आया कि प्रधानमंत्री ने कन्नड़ का नाम सही और स्पष्ट उच्चारण के साथ लिया.
कई समर्थकों ने दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को भी इसी तरह प्रोत्साहन देने की बात कही. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि सिर्फ तारीफ से आगे बढ़कर, देश के भीतर भी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए मजबूत नीतियां बननी चाहिए.
इस पर पीएम मोदी ने दोहराया कि संस्कृति को बचाने की असली ताकत समाज के हाथ में होती है, सरकार का काम उसमें सहयोग देना होता है.
कन्नड़ पाठशाला का उदाहरण देकर प्रधानमंत्री ने फिर साफ किया कि भारत की असली ताकत उसकी भाषाओं और उन्हें बचाने वाले लोगों में है. उन्होंने एक बार फिर “एकता में विविधता” के अपने संदेश को मजबूती से रखा, जहां हर भाषा देश की पहचान का अहम हिस्सा है.
-भारत एक्सप्रेस
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