पटियाला हाउस कोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर दाखिल याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने खारिज कर दिया है. दायर याचिका में न्यू दिल्ली बार एसोसिएशन चुनाव 2025 रद्द करने और दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई थी.
ऑथोरिटी से नहीं जुड़े घोषित नतीजे
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने आदेश में कहा कि एनडीबीए की चुनाव प्रक्रिया को कोई सार्वजनिक चरित्र नहीं कहा जा सकता है. लेकिन इस पर रिट कार्यवाही में फैसला नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने कहा कि एनडीबीए की चुनाव प्रक्रिया या घोषित नतीजे किसी राज्य, सरकार या कानून के तहत किसी ऑथोरिटी के कामों से जुड़े नहीं हैं. कोर्ट ने आगे कहा कि यह कोर्ट के सार्वजनिक कामकाज से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं. यह याचिका कई वकीलों द्वारा दायर किया गया था.
बिना वेरिफिकेशन सदस्यों ने डाले वोट
दायर याचिका में कहा गया था कि बदमाशों ने पोलिंग बूथ के अंदर करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा किया और पूरे पोलिंग स्टेशन पर कब्जा कर लिया. आरोप लगाया गया था कि इस दौरान, प्रॉक्सिमिटी स्कैनिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से बेकार कर दिया गया और बिना वेरिफाई किए सदस्यों ने वोट डाले.
बता दें कि इससे पहले भी इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जिसमें कहा गया था कि मतदाताओं और डाले गए वोटों की संख्या में विरोधाभास है. इसको लेकर चुनाव अधिकारी को प्रतिवेदन दिया गया था. इसपर कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत है.
परिणामों के बाद चुनाव को कैसे दे सकते चुनौती?
कोर्ट को जब पता चला था कि चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं तो पीठ ने याचिकाकर्ता से उचित कानूनी कदम उठाने को कहा था. उसने कहा था कि जब रिजल्ट घोषित हो गया है तो आप कैसे चुनाव को चुनौती दे सकते हैं. क्या इस दशा में कोर्ट का हस्तक्षेप जायज है. चुनाव को चुनौती देना ही एकमात्र उपाय है.
कानून के मुताबिक एक बार चुनाव शुरू हो जाने के बाद और रिजल्ट घोषित हो जाने के बाद हम कुछ नहीं कर सकते. कोर्ट ने कहा था कि बार एसोसिएशन का चुनाव सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत संचालित होते हैं. उसका अपना प्रक्रिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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