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बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. CJI सूर्यकांत की बेंच की सख्त टिप्पणियों के बाद प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने याचिका वापस ले ली.

Bihar, Assembly Elections, Supreme Court
Edited by Radha Priya

बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका को वापस ले लिया. यह याचिका राजनेता प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दायर की थी. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस  जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका की मांग पर याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी है.

मुफ्त योजनाओं और चुनावी हार पर CJI की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि आपको कितने वोट मिले, जब लोग आपको नकार देते है न, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं. तब तो किसी को सीधे चुनाव योजना को ही चुनौती देनी चाहिए थी. सीजेआई ने कहा कि हम मुफ्त योजनाओं के मुद्दे पर विचार करेंगे. लेकिन हमें इसकी सत्यता भी देखनी होगी. हम उस पार्टी के इशारे पर इस पर विचार कर सकते जो अभी-अभी चुनाव हारी है. सत्ता में आने पर आप ठीक यही करेंगे.

सीजेआई ने कहा कि चुनाव याचिका में एक चुनाव को मुद्दा बनाया जाता है. आप एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद्द करने की बात कर रहे है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है. अदालत को इस मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जब राज्य में आचार संहिता लागू था, उस दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रुपए ट्रांसफर किया गया. इस पर सीजेआई ने कहा कि यह महिलाओं की सहायता के लिए जारी राशि का हिस्सा है. दायर याचिका में चुनाव रद्द करने की मांग की थी.

याचिका में क्या था?

दायर याचिका में कहा गया था कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू थी, तब राज्य सरकार ने कथित तौर पर महिला मतदाताओं के खातों में 10000 ट्रांसफर किए. दायर याचिका में यह भी कहा गया था कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के नाम पर 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को यह राशि ट्रांसफर किया गया.

याचिका में कहा गया था कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें आदर्श आचार संहिता के दौरान भुगतान करना गलत था. यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 सहित जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लंधन है.

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सुप्रीम कोर्ट से पार्टी का आग्रह

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया था कि निर्वाचन आयोग को.संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए. साथ ही दायर याचिका में मतदान केंद्रों पर जीविका स्वयं.सहायता.समूहों की लगभग 1.8 लाख महिलाओं की तैनाती को भी चुनौती दी है.

पार्टी ने यह तर्क दिया था कि उनकी उपस्थिति गैरकानूनी थी और इसने चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को और कमजोर किया है. जनसुराज ने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में से 242 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जितने में नाकाम रही थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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