Assam Eviction Case SC: असम सरकार के व्यापक बेदखली अभियान से जुड़े विभिन्न याचिकाओं पर सभी पक्षों की जिरह के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि जिन इलाकों में बेदखली की गई है, वे आरक्षित वन क्षेत्र है और पूरी प्रक्रिया एक.समान व कानून के अनुरूप अपनाई गई है. जबकि याचिकाकर्ताओ की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामों में गंभीर आरोप लगाए हुए कहा कि बेदखली अभियान निष्पक्ष नहीं है, बल्कि.इसमें संस्थागत पक्षपात, चयनात्मक कार्रवाई और प्रभावित समुदायों के प्रति शत्रुतापूर्ण प्रशासनिक माहौल स्पष्ट रूप से झलकता है.
याचिककर्ताओ के वकील क्या बोले?
मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील ने असम के मुख्यमंत्री द्वारा एक समुदाय विशेष को लेकर दिए जा रहे बयान का जिक्र किया, कहा कि एक विशेष समुदाय को अतिक्रमणकारी और बाहरी कह कर बार-बार संबोधित किया जा रहा है. जिससे वातावरण को माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है. यह अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है.
याचिककर्ताओ के वकील ने कहा राज्य सरकार की कार्रवाई निष्पक्ष, गैर मनमानी और पूर्वाग्रह मुक्त होनी चाहिए, खासकर तब जब इसके परिणामस्वरूप वर्षो से बसे परिवारों का विस्थापन हो रहा है. याचिककर्ताओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील चंद्र उदय सिंह और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड आदिल अहमद याचिककर्ताओ की ओर से पेश होकर दलीलें रखी.
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क्या है पूरा मामला?
गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने लंबे समय से बसे उन निवासियों को, जिनमें से कई पिछले सात दशकों से भी ज्यादा समय से राज्य द्वारा दस्तावेजी मान्यता के साथ निर्बाध रूप से वहां रह रहे है. असम वन विनियमन 1891, वन अधिकार अधिनियम 2006 और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के तहत आवश्यक प्रक्रिया, पुनर्वास या निपटान की जांच के बिना जबरन बेदखली से संरक्षण देने से इनकार कर दिया था.
दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता असम के गोलाघाट जिले के विभिन्न गांवों-जैसे नेघेरिबिल, गेलजान, विद्यापुर, राजपुखूरी, उरियमघाट और आस-पास के क्षेत्रों के स्थायी निवासी हैं. उनके पूर्वज सात दशक से ज्यादा समय पहले इन गांवों में आकर बसे थे और जब.से अब तक याचिकाकर्ता व उनके परिवारों ने स्थायी या अर्ध-स्थायी आवास बनाए हैं और कृषि भूमि पर खेती बाड़ी करते रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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