Ayatollah Ali Khamenei: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का आज चौथा दिन है. दोनों महाशक्तियों की संयुक्त सेनाओं ने ईरान के कुल 153 शहरों में एक हजार से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी की है. जिसमें कुल 787 लोगों की मौत हो चुकी है. पहले दिन के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनकी पत्नी की मौत हो गई. जिसके बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता का पद खाली है. जिसको लेकर अब चुनाव होने हैं.
खामेनेई का पूरा नाम अली खामेनेई था और अयातुल्ला ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) का टाइटिल होता है. जिसे फारसी भाषा में रहबर या वालिय-ए-फकीह कहा जाता है. साल 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद 1989 में इस पद का निर्माण किया गया. इसके चुनाव की प्रक्रिया काफी जटिल और अनोखी है. इस पद पर एक बार कोई व्यक्ति बैठ जाए तो उसके साथ यह आजीवन रहता है, जबतक कि उस नेता की मौत, इस्तीफा या वह अक्षम ना हो जाए.
ऐसे होता है अयातुल्ला का चुनाव
ईरान में अयातुल्ला का चुनाव एक्सपर्ट्स की असेंबली (मजलिस-ए-खोब्रेगान-ए-रहबरी) करती है. यह असेंबली 88 सदस्यों वाली एक धार्मिक संस्था है, जिसके सदस्य केवल वरिष्ठ शिया इस्लामी ज्यूरिस्ट (फकीह या मुज्तहिद) होते हैं. इन सदस्यों का चुनाव ईरानी जनता हर 8 साल में चुनाव के जरिये करती है. हालांकि चुनाव जीतने वाला हर सदस्य एक्सपर्ट असेंबली का हिस्सा नहीं बन सकता.
इन उम्मीदवारों की योग्यता पहले गार्जियन काउंसिल (शूरा-ए-नेगाहबान) के द्वारा जांच की जाती है. अगर गार्जियन काउंसिल से मंजूरी मिलती है तब ही कोई व्यक्ति 88 सदस्यों वाली एक्सपर्ट असेंबली का हिस्सा बन सकता है.
कैसे होता है गार्जियन काउंसिल का चुनाव?
ईरान में एक्सपर्ट असेंबली के सदस्यों का चुनाव गार्जियन काउंसिल करती है. यह काउंसिल 12 सदस्यों वाली एक टीम होती है. जिनमें से 6 सदस्य (फकीह) सर्वोच्च नेता के द्वारा नियुक्त किए जाते हैं और बाकी संसद के द्वारा चुने जाते हैं. लेकिन संसद के वो ही सदस्य गार्जियन काउंसिल का हिस्सा बन सकते हैं जिन्हें न्यायपालिका प्रमुख चुनते हैं. इसलिए असेंबली में केवल वहीं उम्मीदवार आ पाते हैं जो ईरान के इस्लामी सिस्टम के अनुकूल होते हैं.
सर्वोच्च नेता का चयन कैसे होता है?
जब कोई अयातुल्ला (सर्वोच्च नेता) इस्तीफा दे देता है या उसकी मौत हो जाती है. तो असेंबली तुरंत बैठक बुलाती है. जिसमें सदस्य गुप्त रूप से चर्चा करते हैं और संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन करते हैं.
ईरान का सर्वोच्च नेता वहीं हो सकता है जो 12 सदस्यीय गार्जियन काउंसिल का फकीह हो. सर्वोच्च नेता के उम्मीदवार के अंदर न्याय, धार्मिक ज्ञान, राजनीति की समझ, साहस और प्रशासनिक क्षमता होना चाहिये. चुनाव के दौरान उपस्थित एक्सपर्ट असेंबली के सदस्य जिस उम्मीदवार को अपना बहुमत देते हैं. वह व्यक्ति ईरान का नया अयातुल्ला चुन लिया जाता है. अयातुल्ला के लिए चुने जाने वाले नेता के साथ यह पद आजीवन रहता है. हालांकि असेंबली समय-समय पर उसकी योग्यता की समीक्षा भी करती है, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है जिसमें किसी आयातुल्ला को चुनौती दी गई हो.
जब अयातुल्ला की मौत हो जाए तब
ईरान के सर्वोच्च नेता की अगर अचानक से मौत हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में नए नेता का चयन तक उनका कामकाज एक अस्थाई परिषद संभालती है. जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के सदस्य होते हैं. यह परिषद केवल कुछ समय के लिए सरकार का कामकाज संभालती है और असेंबली जल्द से जल्द नया नेता चुनती है.
अयातुल्ला अली खामेनेई कैसे बने सर्वोच्च नेता
साल 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी ईरान के पहले सर्वोच्च नेता बने. 1989 में उनकी मृत्यु के बाद असेंबली ने अयातुल्ला अली खामेनेई को चुना. हालांकि उस समय संविधान के अनुसार वो योग्य नहीं थे, इसलिए संविधान में संशोधन करके सर्वोच्च नेता की योग्यता के मानदंड कम किए गए.
ईरान में सर्वोच्च नेता चुनने का सिस्टम बेहद धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर नियंत्रित है. जिसमें वर्तमान सर्वोच्च नेता का प्रभाव बेहद मजबूत होता है, इसलिए असेंबली में सर्वोच्च नेता के विरोध में आवाज नहीं उठती.
-भारत एक्सप्रेस
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