दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तम नगर एमसीडी बुल्डोजर कार्यवाही के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया है. जस्टिस अमित बंसल ने दायर याचिका का निपटारा कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाई कोर्ट को आश्वासन दिया कि एमसीडी बिना नोटिस जारी किए किसी भी अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा. जिसके बाद कोर्ट ने दायर दो याचिकाओं का निपटारा कर दिया है. एक याचिका उत्तम नगर हत्याकांड के एक आरोपी के परिवारवालों ने और दूसरी उसी इलाके के एक निवासी ने दायर की थी. याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि एमसीडी उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना उनके घर को ध्वस्त कर सकती है.
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर वह मकान सार्वजनिक सड़क पर है, तब भी नोटिस जारी होना चाहिए, कोर्ट ने कहा था नोटिस देने में इतनी हिचकिचाहट क्यों हो रही है.
अधिकारियों ने कानून के तहत कदम उठाया
मामले की सुनवाई के दौरान एमसीडी की ओर से पेश वकील ने कहा था कि हमने केवल नालियों की सफाई की है, मैंने संपत्ति नहीं तोड़ी है. उन्होंने कहा था कि नाली पर अतिक्रमण था. फरवरी में शिकायतें मिली थीं. कानून कहता है कि बिना नोटिस दिए अतिक्रमण हटाया जा सकता है. एमसीडी ने कहा था कि उन्होंने सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण किया था. और उनके खिलाफ प्रक्रिया के अनुसार की गई है. जबकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि मुख्य आरोपी का घर तोड़ दिया गया है. मैं सह-आरोपी हूं. एफआईआर 5 मार्च को दर्ज की गई थी.
8 मार्च को बुल्डोजर लेकर मौके पर पहुंची टीम
बाद में कुछ साम्प्रदायिक समूहों ने घर में घुसकर उसे नुकसान पहुंचाया. हमें कई बार धमकियां मिली है कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा. बता दें कि 8 मार्च को दिल्ली नगर निगम की टीम बुल्डोजर लेकर मौके पर पहुंची और आरोपी निजामुद्दीन से जुड़ी प्रॉपर्टी पर कार्रवाई शुरू कर दी. अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान इस संपत्ति में अवैध निर्माण पाए जाने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. इस मामले में 9 मार्च को पुलिस ने तीन महिलाओं को हिरासत में लिया था. जिनमें सायरा, शरीफ और सलमा शामिल थी. इस हत्याकांड के बाद एक नाबालिग सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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