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गुरुग्राम में चार साल की बच्ची से हुए यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकारा, कहा- ‘क्या 4 साल की बच्ची के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं?’, जांच के लिए महिला SIT गठित

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में चार साल की बच्ची से हुए यौन उत्पीड़न मामले की जांच में देरी और पुलिस की असंवेदनशीलता पर कड़ी फटकार लगाई है.

Supreme Court, power of attorney verdict

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में चार साल की बच्ची से हुए यौन उत्पीड़न के मामले की जांच में देरी पर पुलिस को फटकार लगाई है. साथ ही कोर्ट ने जांच के लिए तीन महिला अधिकारियों वाली एसआईटी का गठन किया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने ने हरियाणा सरकार से एसआईटी को जल्द नोटिफाई करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस से 26 मार्च तक केस रिकॉर्ड एसआईटी को सौपनें का निर्देश दिया है. इसके साथ ही गुरुग्राम के जिला जज को बच्ची के रेप केस की जांच पॉक्सो कोर्ट की सीनियर महिला ज्युडिशयल ऑफिसर को सौपनें का निर्देश दिया है.

सीजेआई सूर्यकांत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या आप चार साल की बच्ची से ऐसा बर्ताव करते है? वही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने जांच में देरी पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि चार हफ्ते बीत चुके हैं और अब तक कुछ भी नहीं किया गया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि गुरुग्राम पुलिस द्वारा अपनाई गई असंवेदनशील, लापरवाह, गैर जिम्मेदार और पूरी तरह से गैरकानूनी जांच पद्धति के कारण बच्चे का आधात और भी बढ़ गया. कोर्ट ने कहा कि 5 फरवरी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सीडब्ल्यूसी सदस्यों के आचरण ने पीड़ित की पीड़ा को और बढ़ा दिया. कोर्ट ने कहा कमिश्नर से लेकर सब इंस्पेक्टर तक पूरी तरह पुलिस फोर्स ने यह साबित करने की हर संभव कोशिश की कि बच्चे के पास कोई सबूत नहीं है या माता-पिता की बातें बेतुकी हैं. अदालत ने बच्ची के रेप की घटिया जांच के लिए गुरुग्राम पुलिस अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ एक्शन क्यों न लिया जाए? गुरुग्राम चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के मेंबर्स को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे पूछा गया है कि उन्हें क्यों न हटा दिया जाए?

CJI सूर्यकांत ने पुलिस की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाया

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पुलिस और संबंधित अदालत पर मामले में कर्तव्य की उपेक्षा का आरोप लगाया था. रोहतगी ने कोर्ट को बताया था कि पीड़िता को आरोपी के सामने पेश किया गया. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि पुलिस किस हद तक असंवेदनशील हो गई है. तथा कथित महानगर में ऐसा हो रहा है. रोहतगी ने यह भी कहा था कि कानून कहता है कि जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने हरियाणा सरकार के AAG को महिला आईपीएस अधिकारियों की लिस्ट सौपनें के लिए कहा था. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि दिए गए हलफनामे से पता चलता है कि पीड़िता से अदालत में जिस तरह से पूछताछ की गई, वह बेहद चिंता जनक है.

पुलिस ने एक दिन पहले ही इस मामले में दो महिला मेड और एक युवक को गिरफ्तार किया है. आरोपी मेड संगीता एटा की रहने वाली है. वहीं दूसरी मेड पकिला पश्चिम बंगाल के नदिया की रहने वाली है.

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-भारत एक्सप्रेस



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