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CWC बैठक में विदेश नीति, महिला आरक्षण और परिसीमन पर गरमाई सियासत; 16 अप्रैल के विशेष सत्र पर टिकी नजरें

कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की हालिया बैठक में पश्चिम एशिया संकट, संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण-परिसीमन जैसे अहम राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में सरकार की विदेश नीति और संसदीय कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई है.

special session of Parliament

कांग्रेस की शीर्ष नीति-निर्माण संस्था कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने शुक्रवार को इंदिरा भवन में लगभग तीन घंटे चली अहम बैठक में दो बड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की. बैठक के बाद जारी प्रस्ताव में पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार की विदेश नीति की जमकर आलोचना की गई, जबकि संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र (16-18 अप्रैल) और महिला आरक्षण-परिसीमन पर भी सवाल उठाए गए. चलिए जानते है पूरा मामला:

पश्चिम एशिया पर CWC प्रस्ताव:

पाकिस्तान को ‘पुनर्वास’ का आरोप CWC ने पश्चिम एशिया में हालिया युद्धविराम (ceasefire) का स्वागत किया और इसे तनाव कम करने, कूटनीतिक संवाद तथा स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. लेकिन प्रस्ताव में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए:

• मोदी सरकार की “अदूरदर्शी, विभाजनकारी और अनैतिक” विदेश नीति के कारण पाकिस्तान को संकट समाधान में निर्णायक भूमिका मिल गई, जबकि पहले वह विश्व पटल पर अलग-थलग था.

• वर्षों की मेहनत से पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति कमजोर हुई.

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का युद्ध शुरू होने से ठीक पहले इजराइल दौरा “सैन्य तनाव बढ़ावा” और “चुनावी फायदे के लिए दक्षिणपंथी सरकार का राजनीतिक समर्थन” का संदेश देता है.

• कूटनीति राष्ट्रों के बीच होती है, न कि दो नेताओं के बीच. कूटनीति और चुनावी राजनीति का मिश्रण खतरनाक है.

प्रस्ताव में आगे कहा गया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई, पड़ोसियों से संबंध प्रभावित हुए, हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा भूमिका घटी और ग्लोबल साउथ में नैतिक नेतृत्व क्षमता प्रभावित हुई. कांग्रेस ने सरकार से विपक्षी दलों को विश्वास में लेने और भारत को उसकी ऐतिहासिक कूटनीतिक भूमिका में पुनर्स्थापित करने की अपील की. राष्ट्रध्यक्षों की हत्या, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और नागरिकों पर हमलों को “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया गया.

आनंद शर्मा का विरोधाभास

प्रस्ताव आनंद शर्मा की मौजूदगी में पास हुआ. दिलचस्प बात यह है कि महज कुछ दिन पहले (2-4 अप्रैल) आनंद शर्मा ने खुद सरकार की पश्चिम एशिया नीति की सराहना की थी और उसे “परिपक्व एवं कुशल कूटनीति” (mature and skillful diplomacy) बताया था, जो भारत को “संभावित खतरों” से बचा रही है. बैठक में उन्होंने कोई असहमति दर्ज नहीं कराई.

संसद विशेष सत्र पर कांग्रेस का विरोध

महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बैठक में दो मुख्य मुद्दे थे- पश्चिम एशिया संकट और संसद का विशेष सत्र. कांग्रेस का आरोप:

• 16-18 अप्रैल का सत्र चुनाव प्रचार के दौरान (तमिलनाडु, बंगाल आदि में) बुलाया जाना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन है.

• मल्लिकार्जुन खरगे ने 16-30 मार्च के बीच संसदीय कार्य मंत्री को तीन पत्र लिखकर 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, लेकिन सरकार नहीं मानी.

• 2023 का महिला आरक्षण कानून (अनुच्छेद 334A) परिसीमन और जनगणना के बाद लागू होने का प्रावधान रखता है. अचानक जल्दबाजी क्यों? यह कास्ट सेंसस टालने और चुनावी फायदे के लिए है.

• 15 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की बैठक बुला रहे हैं.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें बढ़ाने (543 से 816) के अनौपचारिक सरकारी प्रस्ताव का विरोध किया. उनका कहना था कि इससे दक्षिण भारत को नुकसान होगा.

परिसीमन और राजनीतिक टकराव पर बढ़ती बहस

महिला आरक्षण और परिसीमन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे हैं. 2023 का संशोधन सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन लागू करने के समय पर अब तीखी बहस छिड़ गई है. दक्षिण के राज्य अपनी आबादी के अनुपात में सीटों के कम होने से चिंतित है. पार्टी विपक्षी एकता मजबूत करने, सरकार पर हमला बोलने और आगामी चुनावी मुद्दों (महिला आरक्षण, कास्ट सेंसस, परिसीमन) को उछालने की रणनीति पर काम कर रही है. अब 16 अप्रैल के विशेष सत्र में इन मुद्दों पर कितनी तीखी बहस होती है, यह देखना होगा.

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-भारत एक्सप्रेस 

Written By: Shubhra Rai (Intern)



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