सुप्रीम कोर्ट ने स्कोरा के शासी निकाय में महिला वकीलों के लिए कुछ पद आरक्षित करने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने ने यह आदेश दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि आगामी चुनावों में संयुक्त कोषाध्यक्ष और सचिव के पदों के साथ-साथ कार्यकारी समिति के दो पद महिला उम्मीदवारों लिए आरक्षित होंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया है.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि सभी राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर कोई समझौता नही किया जा सकता. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि कुछ बार काउंसिलों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम है और इस राहत को उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लागू करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में महिलाओं वकीलों की संख्या ज्यादा है, लेकिन सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वालों की संख्या कम है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि जो लोग घर पर बैठे है और पेशे का चेहरा नही है, उन्हें ऐसा नही करना चाहिए. केवल प्रैक्टिस करने वालों को ही ऐसा करना चाहिए.
महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के बार काउंसिलों के चुनावों में 30 प्रतिशत महिला आरक्षण का आदेश दिया है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 10 प्रतिशत सीटों पर सह-चयन की अनुमति दी है. कोर्ट ने कहा था कि जिन राज्यों में बार काउंसिलों के चुनावों के लिए अधिसूचना अभी जारी नही हुई है. उनमें 30 फीसदी सीटों पर महिला वकीलों का प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उन 6 बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए सीटें निर्धारित करना विवेकपूर्ण नहीं होगा जहां चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है.
-भारत एक्सप्रेस
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