सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असम की अदालत में याचिका दायर किया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए पिछले आदेश और तेलंगाना हाई कोर्ट की टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगा. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने ये आदेश दिया है. वहीं, असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की ओर से दायर याचिका का विरोध किया है.
क्या मैं कोई शातिर अपराधी हूं?
मामले की सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कोर्ट से कहा कि आज शुक्रवार है, मैं सोमवार को असम में फाइल कर रहा हूं. क्या आप मंगलवार तक मेरी रक्षा नहीं कर सकते? उन्होंने कहा कि क्या मैं कोई शातिर अपराधी हूं? लोगों को गुमराह किया गया है.
कोर्ट ने कहा कि 15 अप्रैल को पारित किया गया था, आपने ये अर्जी कल दाखिल किया है. आपने इसे हाई कोर्ट में क्यों नहीं दाखिल किया. मुझसे एक छोटी सी गलती हुई है, मैंने गलत दस्तावेज दाखिल कर दिया है. इसपर कोर्ट ने कहा कि आप इसे छोटी सी लगती कैसे कह सकते हैं?
पवन खेड़ा से मांगा जवाब
सिंघवी ने कहा कि उसी दिन, उसी सुनवाई में हमने सही दस्तावेज दाखिल किया था. उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री को नाराज किया है, इसका मतलब ये नहीं है कि 100 पुलिसकर्मियों को निजामुद्दीन भेज दिया जाए.
सिंघवी ने कोर्ट को ये भी बताया कि पवन खेड़ा की पत्नी विधानसभा का चुनाव लड़ रही है. उसी दिन उन्होंने नामांकन दाखिल किया है. इससे पहले कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा था. कोर्ट ने खेड़ा को छूट दिया था कि वो उचित फोरम में याचिका दायर कर सकत है.
तेलांगाना हाईकोर्ट ने क्यों दी जमानत?
मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि अपराध असम में हुआ और मामला दर्ज भी हुआ असम में, जमानत तेलंगाना हाईकोर्ट ने दी, क्यों. असम सरकार ने हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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