मैदान की घास, समर्थकों का शोर और हरे-मैरून झंडे की शान मोहन बागान के लिए अगर कोई शख्सियत इन सब का केंद्र थी, तो वो थे स्वपन साधन बोस. जिन्हें पूरी दुनिया प्यार से ‘टुटु बोस’ बुलाती थी. मंगलवार की रात भारतीय फुटबॉल जगत के लिए एक काले साये जैसी रही, जब 78 साल की उम्र में इस दिग्गज ने दुनिया को अलविदा कह दिया. दिल की बीमारी से जूझ रहे टुटु बोस ने एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली, और इसी के साथ कोलकाता मैदान के एक सुनहरे युग का अंत हो गया.
सिर्फ प्रशासक नहीं, मोहन बागान की ‘जान’ थे टुटु
कहने को तो टुटु बोस मोहन बागान के अध्यक्ष थे, लेकिन क्लब के लिए उनका वजूद किसी पद से कहीं ऊपर था. नब्बे के दशक की शुरुआत में जब उन्होंने फुटबॉल की दुनिया में कदम रखा, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि आने वाले तीन दशकों तक वो इस क्लब की ढाल बनकर खड़े रहेंगे. धीरेंद्र दे के साथ शुरू हुआ उनका यह सफर ‘मोहन बागान सुपर जायंट’ की पहचान बन गया. उनके लिए यह सिर्फ एक फुटबॉल क्लब नहीं, बल्कि एक जुनून था.
हर संकट में ढाल बनकर खड़े हुए
फुटबॉल की दुनिया में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं, लेकिन टुटु बोस की खासियत यह थी कि उन्होंने क्लब को कभी टूटने नहीं दिया. चाहे आर्थिक तंगी हो या टीम का मनोबल गिरना, टुटु बोस हमेशा सबसे आगे खड़े मिलते थे. मोहन बागान के गलियारों में लोग बताते हैं कि जब भी क्लब मुश्किल में पड़ा, उन्होंने न केवल अपनी जेब खोली, बल्कि अपनी सूझबूझ से बड़े-बड़े फैसले लिए. यही वजह है कि उन्हें ‘मोहनबागान रत्न’ से नवाजा गया- एक ऐसा सम्मान जो उनके प्रति समर्थकों के असीम प्यार को दर्शाता है.
मैदान से FIFA तक का सफर
टुटु बोस का कद सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं था. उनकी काबिलियत का लोहा दुनिया ने माना और वो फीफा (FIFA) टास्क फोर्स के सदस्य भी रहे. लेकिन इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद, उनका दिल हमेशा कोलकाता की गलियों और मोहन बागान के मैदान के लिए धड़कता था. आईएफए (IFA) सचिव अनिर्बाण दत्ता ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया है, जो इस बात का सबूत है कि पूरा फुटबॉल जगत आज कितना अकेला महसूस कर रहा है.
कमी जो कभी पूरी नहीं होगी
कोलकाता के लाइफस्टाइल में फुटबॉल महज एक खेल नहीं, एक अहसास है. और टुटु बोस उस अहसास के सबसे बड़े सिपाही थे. आज मोहन बागान का हर समर्थक, हर खिलाड़ी और कोलकाता मैदान का हर कोना गमगीन है. टुटु बोस भले ही चले गए हों, लेकिन मोहन बागान की हर जीत और हर संघर्ष में उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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