Sugar Export Ban: भारत सरकार ने आम जनता को महंगाई के झटके से बचाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. मोदी सरकार ने देश से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. यह रोक सितंबर 2026 तक लागू रहेगी, जिसमें कच्ची सफेद और रिफाइंड तीनों तरह की चीनी शामिल है. सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर भविष्य में जरूरत पड़ी, तो इस पाबंदी को और भी आगे बढ़ाया जा सकता है.
आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. हाल ही में सरकार ने 15 लाख मीट्रिक टन चीनी बाहर भेजने की इजाजत दी थी, क्योंकि उम्मीद थी कि पैदावार अच्छी होगी. लेकिन अब गणित बदल गया है. ‘एल नीनो’ के असर के चलते मानसून की बारिश कम हुई है, जिससे गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल कमजोर रहने की आशंका है. सरकार का सीधा सा तर्क है पहले अपने देश के लोगों की जरूरत पूरी हो, फिर दुनिया की.
आम आदमी को राहत, पर दुनिया में हड़कंप
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारतीय रसोई को होगा. आने वाले त्योहारों के सीजन में चीनी की कीमतों में उछाल आने की संभावना अब कम हो गई है. हालांकि, भारत के इस कदम से ग्लोबल मार्केट में खलबली मच गई है. जैसे ही यह खबर फैली, न्यूयॉर्क में कच्चे चीनी के दाम 2% और लंदन में सफेद चीनी के दाम 3% तक चढ़ गए. दुनिया भर की उन कंपनियों को अब भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है जो भारतीय चीनी पर निर्भर थीं.
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व्यापारियों की मुश्किल और एथेनॉल पर जोर
इस फैसले का एक दूसरा पहलू भी है. जो चीनी बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है या जिनके शिपिंग बिल पहले ही भरे जा चुके हैं, उन्हें तो विदेश जाने दिया जाएगा. लेकिन जिन व्यापारियों ने नए सौदे किए थे, उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो सकते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक चोट पहुंचेगी.
सरकार का एक बड़ा लक्ष्य एथेनॉल ब्लेंडिंग भी है. सरकार चाहती है कि गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन में हो, ताकि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके. इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता भी कम होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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