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पाकिस्तानी, अफगानी और बांग्लादेशियों को नई शर्तों पर मिलेगी नागरिकता, जानें CAA आवेदन में क्या बदला?

MHA CAA Rules Amendment: गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले आवेदकों को अपने पासपोर्ट की पूरी जानकारी देनी होगी और भारत की नागरिकता मिलने पर इसे 15 दिनों के भीतर सरेंडर करना होगा.

MHA CAA Amendment Rules fo citizenship to Pakistan Afghanistan Bangladesh immigrants

MHA CAA Rules Amendment: गृह मंत्रालय (एमएचए) ने नागरिकता नियम, 2009 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है. इस संशोधन के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को अब अपने पासपोर्ट (वैध या समाप्त) का पूरा विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है.

पासपोर्ट की पूरी जानकारी देना हुआ अनिवार्य (CAA India update)

गृह मंत्रालय द्वारा 18 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इन तीन देशों के आवेदकों को नागरिकता आवेदन पत्र में पासपोर्ट नंबर, जारी करने की तारीख, जारी करने का स्थान और समाप्ति तिथि जैसी जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी. साथ ही, आवेदक को यह घोषणा भी करनी होगी कि उसके पास इन देशों का कोई वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं.

15 दिनों के भीतर सौंपना होगा पुराना पासपोर्ट (CAA For Pakistan Afghanistan Bangladesh immigrants)

अधिसूचना में नया पैराग्राफ (3ए) जोड़ा गया है, जिसके तहत आवेदक को यह लिखित सहमति देनी होगी कि वह भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिनों के भीतर अपना पासपोर्ट संबंधित डाक अधीक्षक या वरिष्ठ अधीक्षक को सौंप देगा. यह प्रावधान पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के उन नागरिकों पर लागू होगा जो भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं.

सुरक्षा एजेंसियों की मांग और पारदर्शिता पर जोर

गृह मंत्रालय का यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप माना जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता हासिल करने की कोशिशों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी. यह संशोधन नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत जारी किया गया है और राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से ही प्रभावी हो गया है.

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CAA के तहत आवेदनों की जांच होगी सख्त

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लाया गया था. नए नियम सीएए के तहत आने वाले आवेदनों की जांच प्रक्रिया को और सख्त बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.



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