CBSE OSM Controversy Update
CBSE OSM Controversy Update: CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है. साथ ही, ओएसएम सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है.
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत से लगातार सवाल उठ रहे थे. कई लोगों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की पारदर्शिता और उसके संचालन को लेकर चिंता जताई थी.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब ओएसएम सेवाओं की खरीद और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तार से जांच कराना चाहती है. इसी उद्देश्य से विशेष जांच समिति बनाई गई है, जो पूरे मामले की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी.
2 जून को हुई अहम बैठक
संसद की शिक्षा, महिला, बाल विकास, युवा और खेल मामलों से जुड़ी स्थायी समिति ने 2 जून को सीबीएसई की परीक्षा और भाषा नीति से जुड़े मुद्दों पर अहम बैठक की. संसद भवन एनेक्सी में हुई इस बैठक में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से उठाई गई शिकायतों और चिंताओं पर चर्चा की गई.
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर हुई. इस प्रणाली में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल रूप में परीक्षकों के पास भेजा जाता है. इसके बाद शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही उत्तरों की जांच करते हैं.
छात्रों और अभिभावकों ने जताई थी चिंता
हाल के दिनों में इस व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं. छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया की सटीकता और पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है. इसी वजह से समिति ने इस मुद्दे की विस्तार से समीक्षा की.
हालांकि, सीबीएसई का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से कॉपियों की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा तेज, पारदर्शी और एक समान तरीके से की जा सकती है. बोर्ड का दावा है कि इससे मानवीय गलतियों की संभावना भी कम होती है.
बैठक में कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा सूत्र को लागू करने की स्थिति पर भी चर्चा की गई. समिति ने दोनों मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली और विभिन्न पक्षों की राय पर विचार किया.
बड़ी संख्या में छात्रों ने दर्ज कराई थी शिकायत
इसके लागू होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराईं. कई छात्रों का आरोप है कि उनके प्राप्तांक उत्तर पुस्तिका में लिखे गए उत्तरों के अनुरूप नहीं हैं. कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि जिस उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन दिखाया गया, वह उनकी उत्तर पुस्तिका ही नहीं थी. इसी कारण प्रभावित छात्रों को संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया गया.
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छात्रों और अभिभावकों ने पुनर्मूल्यांकन एवं उत्तर पुस्तिका सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का भी मुद्दा उठाया. शिकायतों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की गुणवत्ता, डिजिटल मूल्यांकन के दौरान संभावित तकनीकी त्रुटियां, अंक अपलोडिंग में गड़बड़ी की आशंकाएं और परिणाम सत्यापन प्रक्रिया की जटिलता प्रमुख रूप से शामिल रहीं.
-भारत एक्सप्रेस
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