Sonia Gandhi Citizenship Controversy: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आरोपों से जुड़ी पुनर्विचार याचिका पर दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. स्पेशल जज डॉ. विशाल गोगने की अदालत अब इस मामले में 13 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट ने दोनों पक्षों को 1 अगस्त तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने का समय दिया है.
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम साल 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था, जबकि वह आधिकारिक तौर पर अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं.
याचिकाकर्ता का दावा है कि बिना नागरिकता के मतदाता सूची में नाम जोड़ना धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के बिना संभव नहीं था. इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 11 सितंबर को इस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ सेशन कोर्ट में यह रिवीजन पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दाखिल की गई है.
कोर्ट ने उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कड़े सवाल पूछे. जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला करीब आधी सदी पुराना (लगभग 45 साल) है. इतनी पुरानी बात पर अब किसकी जांच की जाएगी? कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की मांग चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ एक दिशाहीन और अंदाजे के आधार पर की जाने वाली जांच (Fishing Inquiry) जैसी लगती है.
सोनिया गांधी के पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी तरफ, सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर.एस. चीमा ने याचिका का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने गलत और भ्रामक दस्तावेज पेश किए हैं. सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया कि केवल नाम दर्ज होने की बात से यह साबित नहीं होता कि सोनिया गांधी ने खुद ऐसा कराया था या उस वक्त क्या परिस्थितियां थीं. सोनिया गांधी के पक्ष ने याचिका को खारिज करने की मांग की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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