Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

नेपाल की बाढ़ और बिहार का ‘पानी का शाप’: इतिहास दोहरा रहा है?

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी नदियों की विनाशकारी शक्ति और बिहार के जल संकट की सच्चाई को फिर उजागर कर दिया. यह घटना दिनेश कुमार मिश्र की पुस्तक ‘पानी का शाप: बिहार में बाढ़-सुखाड़’ के संदेश को जीवंत करती है.

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर रसुवा जिले में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर हिमालयी नदियों की विनाशकारी शक्ति और सीमा-पार जल-संकट की याद दिला दी. भूकंप या हिम-शैल अवताल (avalanche/rockslide) से भोटे कोशी, त्रिशूली और नारायणी (भारत में गंडक) जैसी नदियों में अचानक बाढ़ आ गई. गांव बह गए, सड़कें-पुल टूट गए, जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं और सैकड़ों लोग लापता हो गए. जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल थे. नेपाल में मौतों का आंकड़ा प्रारंभिक रिपोर्टों में 8-22 से बढ़कर लगभग 95-98 तक पहुंच गया, जबकि तिब्बत की ओर भी हताहतों और लापताओं की खबरें आईं. बिहार सरकार ने तुरंत उच्च सतर्कता जारी की, गंडक बैराज के गेट खोले गए और पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों में निकासी व राहत तैयारियां शुरू हुईं.

यह घटना दिनेश कुमार मिश्र की पुस्तक ‘पानी का शाप: बिहार में बाढ़-सुखाड़’ (राजकमल प्रकाशन) के केंद्रीय संदेश को फिर जीवंत कर देती है. मिश्र जो पेशे से इंजीनियर और बाढ़ मुक्ति अभियान के संयोजक रहे हैं बिहार की बाढ़-सुखाड़ त्रासदी को इतिहास, भूगोल, जल-प्रबंधन, अर्थशास्त्र और राजनीति के गुंथे हुए ताने-बाने के रूप में प्रस्तुत करते हैं. वे बताते हैं कि उत्तर बिहार की नदियां अक्सर नेपाल में हुई भारी वर्षा या ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र की घटनाओं से प्रभावित होती हैं. जब नेपाल में पानी उमड़ता है और स्थानीय बारिश भी हो जाए तो छोटी नदियां भी विकराल हो जाती हैं. विडंबना यह कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से महज आधा-पौन किलोमीटर दूर सूखे का साम्राज्य पसरा रहता है. गंगा के दक्षिण का इलाका समय पर वर्षा न होने पर त्रस्त हो जाता है. किसान की खुशहाली अभी भी ‘समय की वर्षा’ पर निर्भर है.

पुस्तक याद दिलाती है कि 5 जनवरी 1950 को पटना से प्रकाशित खबरों में नेपाल के वराहक्षेत्र में कुतुबमीनार से तीन गुना ऊंचे बांध का दावा किया गया था. जो बिहार की बाढ़ और सिंचाई की समस्या हमेशा के लिए समाप्त कर देगा. न बांध बना, न समस्या का समाधान हुआ. विकल्प के रूप में तटबंधों का विस्तार हुआ. 1950 के दशक में लगभग 160 किलोमीटर से आज लगभग 3800 किलोमीटर. परिणाम? बाढ़-प्रभावित क्षेत्र 25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 74 लाख हेक्टेयर हो गया. मिश्र पूछते हैं, क्या तटबंध ही एकमात्र विकल्प हैं, या हमें नए रास्ते तलाशने होंगे? ‘ज्यों-ज्यों दवा दी… दर्द बढ़ता ही गया.’ राहत सामग्री समाधान नहीं होती, उसकी सीमाएं सब जानते हैं. श्रमजीवी एक्सप्रेस, गरीब रथ जैसी ट्रेनों के नाम हमारी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सार्वजनिक कर देते हैं. श्रमिक अब पश्चिम और दक्षिण की ओर पलायन कर रहे हैं.

आज की नेपाल बाढ़ उसी श्रृंखला की कड़ी है. भोटे कोशी-त्रिशूली से नारायणी-गंडक तक का जल-प्रवाह सीमा-पार है. बिहार के चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी समेत कई जिले हर वर्ष नेपाल की वर्षा या ऊपरी घटनाओं की मार झेलते हैं. मिश्र की किताब केवल सूचना नहीं देती यह सोचने को विवश करती है. बुद्ध ने कभी पाटलिपुत्र के संदर्भ में जो चेतावनी दी थी वही आज पूरे बिहार पर लागू होती प्रतीत होती है. राज्य ‘पानी के शाप’ से ग्रस्त है. यह पुस्तक शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, छात्रों और शासन-प्रशासन से जुड़े लोगों के लिए अनिवार्य पाठ है. यह स्थापित धारणाओं को चुनौती देती है और पूछती है कि क्या हमारे उपाय सही दिशा में हैं.

नेपाल की इस ताजा आपदा ने फिर साबित किया कि पानी की समस्या केवल स्थानीय नहीं, क्षेत्रीय और पारिस्थितिक है. तटबंध, बांध या राहत सामग्री अकेले पर्याप्त नहीं. जलवायु परिवर्तन, हिमालयी अस्थिरता, अव्यवस्थित विकास और सीमा-पार समन्वय की कमी मिलकर त्रासदी को बढ़ाते हैं. मिश्र की किताब पढ़ने के बाद पाठक पहले जैसा नहीं रह जाता. क्योंकि यह केवल जानकारी नहीं देती बल्कि विवेक जगाती है. पानी का शाप केवल बिहार की बाढ़-सुखाड़ की कहानी नहीं यह विकास, नीति और दृष्टि की कहानी है. आज की घटना हमें याद दिलाती है कि जब तक हम नदियों को उनके स्वभाव के अनुरूप नहीं समझेंगे और क्षेत्रीय सहयोग के साथ टिकाऊ समाधान नहीं खोजेंगे, तब तक यह शाप बार-बार लौटता रहेगा.

(लेख दिनेश कुमार मिश्र की पुस्तक ‘पानी का शाप: बिहार में बाढ़-सुखाड़’ के संदर्भ और 26 अगस्त 2026 की नेपाल-तिब्बत सीमा बाढ़ की समसामयिक रिपोर्टों पर आधारित है.)

ये भी पढ़ें-हिमस्खलन से फटा नदी का सीना या भूकंप ने मचाई तबाही? नेपाल बाढ़ की असली वजह क्या?

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital

Latest