पुतिन की पार्टी का महा-विजय
Russia Parliamentary Election Results: रूस में संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजे सामने आ गए हैं और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया ने एक बार फिर भारी बहुमत हासिल किया है. सोमवार को चुनाव आयोग ने बताया कि पार्टी को स्टेट ड्यूमा में बंपर वोट मिले हैं और आंकड़ा प्रचंड बहुमत से ऊपर जा चुका है.
विपक्षी उम्मीदवारों की गैरमौजूदगी
यह चुनाव उस समय हुआ जब कई विपक्षी नेताओं को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया गया था. सरकार पर मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण के आरोप भी लगे. यही वजह रही कि विपक्ष की मौजूदगी बेहद कमजोर दिखाई दी.
रूस में चुनावी प्रक्रिया
रूस की संसद स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें होती हैं. इनमें से 225 सीटें पार्टी लिस्ट के आधार पर तय होती हैं और बाकी 225 पर सीधे उम्मीदवार चुने जाते हैं. इस बार यूनाइटेड रशिया को पार्टी लिस्ट वोटिंग में करीब 58 फीसदी वोट मिले. वहीं सीधे उम्मीदवारों वाली सीटों पर भी पार्टी का दबदबा रहा और 208 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे रहे. शुरुआती नतीजों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया को कुल मिलाकर लगभग 355 सीटें मिल सकती हैं.
यूक्रेन कब्जे वाले इलाकों में भी मतदान
यह चुनाव खास इसलिए भी रहा क्योंकि रूस ने मतदान उन इलाकों में भी कराया जिन पर उसने यूक्रेन से कब्जा कर अपने देश में मिलाने का दावा किया है. इनमें चार क्षेत्र और 2014 में कब्जाए गए क्रीमिया भी शामिल हैं. यूक्रेन ने इन चुनावों को अवैध करार दिया है.
विपक्ष पर कार्रवाई
चुनाव से पहले विपक्षी दलों पर कार्रवाई चर्चा में रही. युद्ध की आलोचना करने वाली याब्लोको पार्टी को रूस के सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी लिस्ट वाले चुनाव से बाहर कर दिया. हालांकि उसके कुछ उम्मीदवार व्यक्तिगत सीटों से चुनाव लड़े. कम्युनिस्ट पार्टी ने भी आरोप लगाया कि उनके पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों में घुसने नहीं दिया गया.
अंतरराष्ट्रीय निगरानी पर विवाद
रूस ने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) को चुनाव की निगरानी के लिए आमंत्रित नहीं किया. रूसी विदेश मंत्रालय ने संगठन पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया. वहीं OSCE संसदीय सभा के अध्यक्ष ने इसे रूस की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया.
मतदान केंद्रों पर सैनिकों की मौजूदगी
डोनेत्स्क के कब्जे वाले हिस्से से तस्वीरें सामने आईं जिनमें हथियारबंद रूसी सैनिकों की मौजूदगी में लोग वोट डालते दिखे. इन तस्वीरों ने चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए.
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नतीजों का असर
यह चुनाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव था. शुरुआती नतीजों से साफ है कि यूनाइटेड रशिया ने संसद में अपना दबदबा कायम रखा है. लेकिन विपक्ष की गैरमौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी की कमी ने इस चुनाव को विवादों के घेरे में ला दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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