लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक नया और गंभीर मोड़ आया है. मामले की सुनवाई कर रही सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ट्रायल कोर्ट के जज पर लगे आरोपों की जांच करने और दो हफ्ते के भीतर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण द्वारा निचली अदालत के न्यायाधीश के कामकाज के तरीके पर उठाए गए गंभीर सवालों के बाद शीर्ष अदालत ने यह कदम उठाया है.
‘जज खुद मंगाते थे केस और दे देते थे जमानत’: प्रशांत भूषण
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पीठ के सामने दावा किया कि संबंधित जज का काम करने का तरीका बेहद चौंकाने वाला है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल जज ने एनडीपीएस (NDPS) और एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) से जुड़े कई मामलों को खुद अपने पास ट्रांसफर करवाया और उनमें आरोपियों को जमानत दे दी. इतना ही नहीं, मुकदमे के अंतिम चरण में दूसरे मामलों को वापस लेकर आरोपियों को बरी कर दिया गया. भूषण ने कोर्ट से कहा कि ये घटनाएं किसी भी जज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देने वाली हैं.
गवाहों पर मनमानी का आरोप
प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि गवाहों द्वारा बीमारी की मेडिकल पर्ची पेश किए जाने के बावजूद जज उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर रहे हैं. वारंट जारी करने के अगले ही दिन अगले चरण के लिए तीन-तीन नए गवाहों को समन भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में इस तरह की मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती.
सुनवाई की रफ्तार पर SC पहले भी जता चुका है चिंता
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मामले के ट्रायल की धीमी रफ्तार और तौर-तरीकों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा और उनकी अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए थे. अब ट्रायल जज के आचरण पर उठे इन गंभीर सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुधारात्मक कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को जांच का जिम्मा सौंपा है. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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