Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली वोटर लिस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 33 लाख नोटिस पर पूछा सवाल

दिल्ली की मतदाता सूची से 47 लाख नाम हटाने और 33 लाख लोगों को नोटिस भेजे जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. सीजेआई ने चुनाव आयोग को प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने और जायज मतदाता का नाम न हटाने का निर्देश दिया है.

Supreme Court Notice to Election Commission Over Delhi Voter List Discrepancies
Edited by Vaibhav Gupta

Delhi Voter List Case: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पश्चिम बंगाल और बिहार के मामलों में हमने जो अंतरिम आदेश दिए थे, उनका पालन करें और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.

एक करोड़ से ज्यादा लोगों को नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पहले बंगाल में एक करोड़ से ज्यादा को नोटिस दिया गया. अब दिल्ली में 33 लाख से ज्यादा को नोटिस भेजा गया है और इसकी अपील सालों साल लंबित रहेगी जैसा बंगाल में हुआ है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि लॉजिकल डीसक्रिपेंसी की कौन सी कैटेगरी में नोटिस भेजे गए हैं. चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील डीएस नायडू ने कहा कि नोटिस में स्पष्ट कारण बताया गया है. वहीं, भूषण ने कहा कि नोटिस के बाद 12 दस्तावेज मुहैया कराने होंगे. इसकी एक निर्धारित अवधि है.

तार्किक विसंगति को स्पष्ट करने की जरूरत

चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील नायडू ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण पर तंज कसते हुए कहा कि उनका मकसद सिर्फ प्रिंट मीडिया में जगह पाना है. यह जल्दबाजी है. हमें अपने सूत्रों से पता चला है, हमने प्रेस नोट जारी किया था. नायडू ने कहा कि हर नोटिस में कारण बताया जाता है. यह कोई मुद्दा ही नहीं है.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आपको तार्किक विसंगति को थोड़ा स्पष्ट करने की जरूरत है. भूषण ने कोर्ट को यह भी बताया कि वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने मुझे फोन करके बताया कि उनके परिवार के सभी लोगों का.नाम कट गया है.

एक भी वोटर न हटाने का भरोसा

चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि हमने पेंडिंग मामलों को निपटारे के लिए मैनपावर बढ़ाई है. कारण बताए गए है जानकारी दिखाई जा रही है. जस्टिस बागची ने कहा कि आपने लगभग 30 लाख नोटिस भेजे. कितने बीएलओ तैनात किए गए हैं?

नायडू ने कहा कि 14000 बीएलओ, 1200 ईआरओ और 29 अक्टूबर की डेडलाइन है. अगर काम पूरा नहीं हुआ तो हम समय बढ़ाने के लिए तैयार है. यह चुनाव वाला राज्य नहीं है. हम भरोसा दिलाते हैं और एक भी वोटर का नाम नहीं हटाया जाएगा.

इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर 14000 बीएलओ हैं तो वे लोगों की मदद कर सकते है. कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि सवालों का जवाब देने के लिए किस तरह की जानकारी काफी है? आयोग के वकील ने बताया कि 12 डॉक्यूमेंटस ही काफी नहीं है.

क्या है मामला?

यह याचिका समाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज और अमृता जौहरी की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर एसआईआर प्रक्रिया में पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है.

बता दें कि चुनाव आयोग ने 31 अगस्त को मतदाता सूची का मसौदा जारी किया था, जिसके तहत कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली वोटर की लिस्ट से 47 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए थे. याचिकाकर्ता का आरोप है कि 47 लाख के अलावा 33 लोगों को लॉजिकल विसंगतियों के नाम पर नोटिस भेजा गया है.

यह भी पढ़ें: ‘नियम ताक पर रखकर बनाए अफसर!’ ओडिशा DGP लिस्ट में हेरफेर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमिकस क्यूरी ने खोली पोल

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read